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Monday, May 11, 2026

होर्मुज में युद्ध के बादल: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का शांति प्रस्ताव, बोले- “अब और नहीं हंस पाएगा ईरान”

वाशिंगटन/तेहरान । मध्य पूर्व (Middle East) के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में तनाव कम होने के बजाय और गहरा गया है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध टालने के कूटनीतिक प्रयासों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की शर्तों को ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताकर खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ने की आशंका तेज हो गई है।

ट्रंप का कड़ा रुख: “समझौता नामंजूर”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट साझा करते हुए ईरान के ताजा शांति प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी। ईरान ने युद्ध रोकने के लिए नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, प्रतिबंध खत्म करने और परमाणु कार्यक्रम में दखल न देने की शर्त रखी थी। ट्रंप ने कहा कि ईरान पिछले 47 वर्षों से दुनिया के साथ खेल खेल रहा है। उन्होंने पूर्ववर्ती ओबामा सरकार के परमाणु समझौते को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि ईरान की परमाणु शक्ति बनने की महत्वाकांक्षा और आतंकी समूहों (हमास व हिजबुल्ला) को उसका समर्थन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ईरान की जवाबी चेतावनी: “कल्पना से परे होगा अंजाम”
ईरान की सेना ने अमेरिका और इजराइल को संयुक्त रूप से चेतावनी दी है। ईरानी रक्षा अधिकारियों ने कहा कि यदि अमेरिका ने अपनी आक्रामकता जारी रखी, तो उसे ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ेगा जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी विदेश नीति और परमाणु अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा।

यूरोपीय शक्तियों की एंट्री: ‘मिशन होर्मुज’
तनाव के बीच फ्रांस और ब्रिटेन ने भी अपनी भूमिका स्पष्ट की है। ब्रिटिश रॉयल नेवी ने अपने आधुनिक विनाशक युद्धपोत ‘एचएमएस ड्रैगन’ को मध्य पूर्व भेजने का निर्णय लिया है। यह युद्धपोत मिसाइल और हवाई खतरों से निपटने में सक्षम है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे सैन्य तैनाती के बजाय एक ‘अंतरराष्ट्रीय मिशन’ बताया है, जिसका उद्देश्य जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। हालांकि, ईरान ने फ्रांस और ब्रिटेन को अमेरिकी कार्रवाई का साथ देने पर ‘निर्णायक जवाब’ देने की धमकी दी है।

शांति की राह में बाधा बने ये मुद्दे
परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना चाहता है।
नाकाबंदी: ईरान की अर्थव्यवस्था नाकाबंदी और प्रतिबंधों के कारण चरमरा रही है।
क्षेत्रीय वर्चस्व: इजराइल के खिलाफ ईरान के आक्रामक रुख और प्रॉक्सी वॉर ने वाशिंगटन की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

वर्तमान हालातों को देखते हुए कूटनीति विफल होती दिख रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य टकराव की संभावना प्रबल है।

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