धनबाद | धनबाद जिले के निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस और ड्रेस-किताबों के नाम पर होने वाली वसूली पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त (DC) आदित्य रंजन ने झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधित) अधिनियम, 2017 के तहत सभी स्कूलों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर अब 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
फीस को लेकर मिली बड़ी राहत
अभिभावकों को आर्थिक बोझ से बचाने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तिमाही फीस का विकल्प: स्कूल अब अभिभावकों पर एकमुश्त फीस जमा करने का दबाव नहीं बना सकेंगे। फीस अब तिमाही (Quarterly) आधार पर जमा की जा सकेगी।
री-एडमिशन शुल्क पर रोक: स्कूलों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे दोबारा नामांकन (Re-admission) के नाम पर कोई शुल्क नहीं लेंगे।
पारदर्शिता अनिवार्य: वार्षिक शुल्क का पूरा विवरण स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करना होगा। साथ ही, डेवलपमेंट फीस लेने का ठोस कारण भी बताना होगा।
ड्रेस और किताबों के लिए नए नियम
स्कूलों में ड्रेस और किताबों के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए गए हैं:
परिसर में बिक्री बंद: स्कूल परिसर के भीतर किताब और ड्रेस बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
5 साल तक नो चेंज: कोई भी स्कूल 5 साल से पहले अपनी यूनिफॉर्म (ड्रेस) नहीं बदल सकेगा।
समय पर जानकारी: अगले सत्र के लिए किताबों और ड्रेस का विवरण नवंबर तक ही वेबसाइट पर अपलोड करना होगा, ताकि अभिभावक बाजार से अपनी सुविधा अनुसार सामग्री खरीद सकें।
छात्र सुरक्षा और BPL कोटा
शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए:
सड़क सुरक्षा: स्कूल वाहनों में GPS और CCTV लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना होगा।
आरक्षण: बीपीएल (BPL) श्रेणी के छात्रों के लिए 25% आरक्षित सीटों पर दाखिला सुनिश्चित करना होगा।
जांच टीम: नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने 5 सदस्यीय टीम का गठन किया है, जो स्कूलों की औचक जांच (Surprise Inspection) करेगी।
‘नॉट फॉर प्रॉफिट’ पर जोर
उपायुक्त आदित्य रंजन ने स्कूलों को नसीहत दी कि शिक्षण संस्थान ‘नॉट फॉर प्रॉफिट’ सिद्धांत पर काम करें न कि व्यावसायिक लाभ के लिए। उन्होंने सभी निर्देशों का पालन करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।

