नई दिल्ली। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और संभावित जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत आयातकों को भारत में चीनी पहुंचने और बिल ऑफ एंट्री दाखिल होने के दो महीने के भीतर उसे रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने की बाध्यता होगी। सरकार के इस फैसले से बाजार में चीनी की आपूर्ति लगातार बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।
10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति
सरकार ने 20 अगस्त को टैरिफ रेट कोटा योजना के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी को बिना सीमा शुल्क भारत लाने की अनुमति दी थी। पहले नियम के अनुसार आयातित कच्ची चीनी को रिफाइन कर बाजार में बेचने की अंतिम समय-सीमा 31 अक्टूबर तय की गई थी।
इस व्यवस्था में यह संभावना थी कि कुछ आयातक अगस्त में चीनी भारत लाकर अक्टूबर के अंत तक अपने पास रख सकते थे। इससे बाजार में तत्काल आपूर्ति प्रभावित होने और कीमतों में तेजी आने की आशंका बनी हुई थी।
अब हर आयात खेप के लिए 60 दिन की समय-सीमा
नए नियम में एक निश्चित अंतिम तारीख की व्यवस्था को बदल दिया गया है। अब जिस दिन आयातित चीनी भारत के बंदरगाह पर पहुंचेगी और उसकी बिल ऑफ एंट्री दाखिल होगी, उसके बाद 60 दिनों के भीतर उसे रिफाइन कर घरेलू बाजार में बेचने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इस व्यवस्था से आयातित चीनी को लंबे समय तक गोदामों में रोककर रखने की संभावना कम होगी। सरकार का उद्देश्य बाजार में नियमित आपूर्ति बनाए रखना और त्योहारी मांग के दौरान कृत्रिम कमी पैदा होने से रोकना है।
कीमतों में स्थिरता की उम्मीद
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, हाल के दिनों में चीनी की कीमतों में आई तेजी का प्रमुख कारण देश में वास्तविक कमी नहीं, बल्कि जमाखोरी और सट्टेबाजी की कोशिशें हो सकती हैं। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद के बीच कुछ कारोबारियों द्वारा स्टॉक बढ़ाने से बाजार में कीमतों को लेकर चिंता पैदा हुई।
विशेषज्ञों के मुताबिक, देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। ऐसे में आयातित चीनी को तय समय में बाजार में उतारने की नई व्यवस्था से उपलब्धता बेहतर रह सकती है और जमाखोरी की गुंजाइश कम होगी।
त्योहारों में उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद
सरकार के इस फैसले का सीधा उद्देश्य चीनी की आपूर्ति को सुचारु बनाए रखना और त्योहारों के दौरान कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकना है। यदि आयातित चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है, तो मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में आपूर्ति का दबाव बना रहेगा।
इससे चीनी की कीमतों में स्थिरता आने और त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।
