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Tuesday, August 25, 2026

अमेरिका के नए वीजा नियमों से भारतीयों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली। अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की ओर से वीजा और आव्रजन नियमों को लगातार सख्त किए जाने से भारतीय छात्रों, पेशेवरों और अमेरिका में काम कर रहे वीजा धारकों के बीच अनिश्चितता बढ़ गई है। प्रस्तावित नए नियमों में एच-1बी वीजा के लिए 1,03,265 अमेरिकी डॉलर तक की फीस का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा नौकरी गंवाने वाले एच-1बी वीजा धारकों के लिए मिलने वाली 60 दिन की छूट अवधि खत्म करने जैसे प्रस्तावों ने भी अमेरिका में काम कर रहे विदेशी पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है।

एच-1बी एक्सटेंशन के इंतजार में भारत नहीं आ पा रहे प्रोफेसर

अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर निलोत्पल सान्याल इस साल अपने परिवार से मिलने भारत नहीं आ सके। वह अपने एच-1बी वीजा के एक्सटेंशन का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने मार्च में एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया था, लेकिन बाद में प्रोसेसिंग में करीब 10.5 महीने लगने की जानकारी सामने आई।

सान्याल का मौजूदा एच-1बी वीजा अगस्त के अंत में समाप्त हो रहा है। उन्हें आशंका है कि अगर वह अमेरिका से बाहर गए और भारत में वीजा स्टांपिंग नहीं हो सकी तो वह वापस अमेरिका नहीं लौट पाएंगे। भारत में 2026 के लिए एच-1बी वीजा इंटरव्यू के स्लॉट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।

1,03,265 डॉलर फीस का प्रस्ताव

अमेरिकी प्रशासन एच-1बी और एल-1 जैसे वीजा को महंगा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने सभी एच-1बी वीजा के लिए 1,03,265 अमेरिकी डॉलर की फीस का प्रस्ताव रखा है।

यह कदम पिछले साल जारी उस राष्ट्रपति आदेश के बाद सामने आया है, जिसमें कुछ नए एच-1बी आवेदनों पर सामान्य शुल्क के अतिरिक्त 1 लाख डॉलर का भुगतान करने की शर्त रखी गई थी। इस फैसले को अदालतों में कानूनी चुनौती भी मिली थी।

प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की लागत बढ़ाना बताया जा रहा है, ताकि अमेरिकी कंपनियों के लिए स्थानीय कर्मचारियों को नियुक्त करना अधिक आकर्षक हो।

नौकरी जाने पर 60 दिन की राहत खत्म करने का प्रस्ताव

एक अन्य प्रस्ताव में एच-1बी वीजा धारकों के लिए नौकरी समाप्त होने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड खत्म करने की बात कही गई है। वर्तमान व्यवस्था में नौकरी जाने के बाद वीजा धारक को नई नौकरी खोजने या अपनी इमिग्रेशन स्थिति बदलने के लिए सीमित समय मिलता है।

यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होता है तो नौकरी गंवाने वाले विदेशी पेशेवरों के पास अमेरिका में रहने के लिए पहले की तुलना में काफी कम गुंजाइश रह सकती है। इससे भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों और अन्य उच्च-कुशल पेशेवरों पर खासा असर पड़ने की आशंका है।

एच-1बी वीजा में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी

अमेरिका के एच-1बी कार्यक्रम में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा जारी कुल एच-1बी वीजा में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत रही है। ऐसे में नियमों में बदलाव का सीधा असर भारतीय तकनीकी और पेशेवर समुदाय पर पड़ने की संभावना है।

इमिग्रेशन विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार बदलती नीतियों का असर सिर्फ वीजा फीस या आवेदन प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। वीजा अपॉइंटमेंट में देरी, प्रोसेसिंग का लंबा समय और अमेरिका से बाहर यात्रा करने को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी विदेशी पेशेवरों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

छात्रों के सामने भी बढ़ी चुनौतियां

अमेरिका की बदलती वीजा नीति को लेकर चिंता छात्रों और उनके अभिभावकों में भी बढ़ रही है। भारी शिक्षा ऋण लेकर अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद नौकरी मिलने और लंबे समय तक वहां रहने की अनिश्चितता छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर रही है।

एफ-1 वीजा वाले छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के नियमों में भी सख्ती की गई है। अमेरिकी सरकार वीजा आवेदकों की सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच भी कर रही है। इन बदलावों के कारण अमेरिका जाने के इच्छुक विद्यार्थी अब जर्मनी समेत दूसरे देशों को भी वैकल्पिक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

दिल्ली स्थित माइंडवेज कंसल्टिंग के निदेशक अनिरुद्ध गुप्ता के अनुसार, छात्र अमेरिका के लिए आवेदन तो कर रहे हैं, लेकिन अब वे साथ में बैकअप विकल्प भी तैयार रख रहे हैं। उनके मुताबिक, स्टूडेंट वीजा अपॉइंटमेंट के लिए लंबा इंतजार भी बड़ी चुनौती बन गया है।

कानूनी प्रवास में कमी आने का अनुमान

नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के विश्लेषण के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की मौजूदा वीजा नीतियों के कारण उनके चार साल के कार्यकाल के अंत तक अमेरिका में कानूनी आव्रजन में 33 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। अनुमान है कि इससे 15 लाख से 24 लाख कम कानूनी प्रवासी अमेरिका पहुंच सकते हैं।

जनवरी 2026 के एक विश्लेषण में यह भी अनुमान लगाया गया था कि ट्रंप प्रशासन के दौरान ग्रीन कार्ड पाने वाले कानूनी प्रवासियों की संख्या में 33 से 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

वीजा नीति के साथ एआई भी बदल रहा रोजगार बाजार

अमेरिका जाने वाले छात्रों और पेशेवरों के सामने चुनौती सिर्फ वीजा नियमों की नहीं है। रोजगार बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने भी करियर को लेकर नई अनिश्चितताएं पैदा की हैं।

आईड्रीमकरियर के संस्थापक और सीईओ आयुष बंसल के मुताबिक, कॉलेज और कोर्स के बाद नौकरी तलाशने की पूरी प्रक्रिया पर वीजा नियमों के साथ एआई का भी प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीकी क्षेत्र में नौकरी की मांग और भूमिकाओं में तेजी से बदलाव हो रहा है।

इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि जिन छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिका अपने विशेषीकृत पाठ्यक्रमों और उच्चस्तरीय रोजगार अवसरों के कारण बेहतर विकल्प बना हुआ है, वे सख्त नियमों के बावजूद अमेरिका का रुख करना जारी रख सकते हैं। हालांकि, बदलती नीतियों के कारण अब अमेरिकी सपने की राह पहले की तुलना में अधिक महंगी, जटिल और अनिश्चित होती जा रही है।

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