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Friday, March 13, 2026

विद्यालयों में 1971 के भारत–पाक युद्ध की जीत से विद्यार्थियों को कराया गया रूबरू

पूर्वी सिंहभूम। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद की ओर से विजय दिवस पर शहर के विभिन्न विद्यालयों में 1971 के भारत–पाक युद्ध की ऐतिहासिक जीत और रणवीरों की शौर्यगाथा को विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया। 16 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश युद्ध में पाकिस्तान पर भारत की निर्णायक विजय की स्मृति में सोमवार को “युद्ध की कहानी, युद्धवीरों की जुबानी” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को देश की सैन्य शक्ति, बलिदान और पराक्रम से रूबरू कराया गया।
इस अवसर पर करीब पांच विद्यालयों में पूर्व सैनिकों एवं विद्यालय प्राचार्यों ने विजय संदेश पढ़कर सुनाया। विद्यार्थियों को बताया गया कि युद्ध में करारी हार के बाद पाकिस्तान के जनरल ए.ए.के. नियाजी ने अपने 93,000 सैनिकों के साथ भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इस ऐतिहासिक घटना के साथ ही विश्व के मानचित्र पर एक नए राष्ट्र बांग्लादेश का उदय हुआ और भारत ने अपनी सैन्य क्षमता का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया।

परिषद की ओर से आवासीय नेताजी सुभाष गोलमुरी में सुभाष कुमार, गोलमुरी स्थित किला भारती में राजीव कुमार, संत जोसेफ हाई स्कूल एवं ओल्ड बारीडीह में संतोष सिंह ने विजय संदेश पढ़कर विद्यार्थियों को 1971 की गौरवपूर्ण जीत की याद दिलाई। अन्य विद्यालयों में शिक्षकों ने बच्चों को विजय दिवस का महत्व बताते हुए संदेश का वाचन किया। वक्ताओं ने कहा कि मात्र 14 दिनों तक चले इस युद्ध में भारतीय सेना की उत्कृष्ट रणनीति, अनुशासन और अदम्य साहस के बल पर 93 हजार से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर होना पड़ा, जो विश्व युद्ध इतिहास में एक अविस्मरणीय अध्याय है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि युद्ध इतिहास में यह पहली बार था जब किसी देश की सेना ने अपने शौर्य से न केवल इतिहास रचा, बल्कि भूगोल को बदलते हुए एक नए देश का निर्माण कराया। इस अवसर पर वीर शहीदों के बलिदान को नमन करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया गया। परिषद ने जानकारी दी कि 16 दिसंबर को गोलमुरी स्थित शहीद स्मृति स्थल पर विजय दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। विजय संदेश के वाचन के साथ युवाओं ने भारतीय सेना के पराक्रम और शौर्य को सदैव जीवंत बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर “भारत माता की जय” और “वीर शहीद अमर रहें” के गगनभेदी नारों से वातावरण देशभक्ति और ओज से सराबोर हो उठा।

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