रांची। विधानसभा घेराव के दौरान जेपीएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा मंगलवार को मानसून सत्र के चौथे कार्यदिवस पर विधानसभा परिसर में भी जोरदार तरीके से उठा। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफे की मांग की। भाजपा विधायकों ने छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को दमनात्मक बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और आंदोलनकारी छात्रों की मांगों पर सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सरकार दमनात्मक कार्रवाई के जरिए छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों को दबाना चाहती है, लेकिन छात्र आंदोलन को इस तरह कुचला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि राज्य के छात्र अपनी समस्याओं और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। भाजपा समेत विभिन्न दलों के नेता भी छात्रों की मांगों को लेकर सदन के अंदर और बाहर आवाज उठाते रहे हैं।
रात के अंधेरे में छात्रों पर लाठीचार्ज का आरोप
भाजपा विधायक शशि भूषण मेहता ने आरोप लगाया कि रात के अंधेरे में आंदोलन कर रहे छात्रों पर जिस तरह लाठियां बरसाई गईं, वह सरकार की दमनकारी नीति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि टीडीपीएल कंपनी के माध्यम से जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है, जिससे राज्य के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ा है।
शशि भूषण मेहता ने दावा किया कि टीडीपीएल कंपनी के गिरफ्तार अधिकारियों ने सीआईडी के समक्ष सीजीएल परीक्षा में भी गड़बड़ी की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में छात्रों की यह मांग उचित है कि कंपनी द्वारा आयोजित सभी संबंधित परीक्षाओं की जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें रद्द किया जाए। भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय उनके आंदोलन को पुलिस कार्रवाई के जरिए दबाने का प्रयास कर रही है।
विधानसभा परिसर में भाजपा विधायकों की नारेबाजी के कारण कुछ देर तक माहौल गरमाया रहा। मानसून सत्र के चौथे कार्यदिवस पर भी जेपीएससी और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सदन के अंदर और बाहर प्रमुखता से छाया रहा।
