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Tuesday, June 16, 2026

संसदीय गतिरोध: मंत्रियों की गैरमौजूदगी पर भड़का विपक्ष, नेपाल प्रतिनिधि सभा की बैठक स्थगित

काठमांडू । नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में मंगलवार को उस समय बड़ा राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया, जब संघीय सरकार के संबंधित मंत्रियों की अनुपस्थिति के कारण बजट प्रस्तावों पर चर्चा नहीं हो सकी. मंत्रियों के सदन में न पहुंचने से नाराज विपक्ष के हंगामे और आपत्ति के बाद अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

मंगलवार को प्रतिनिधि सभा में बेहद महत्वपूर्ण सत्र चल रहा था, जिसमें देश के नौ प्रमुख मंत्रालयों के बजट प्रस्तावों पर चर्चा और बहस होनी थी.

नियमावली का हवाला देकर सांसद ने जताई कड़ी आपत्ति

बजट जैसे गंभीर विषय पर चर्चा के दौरान मंत्रियों की कुर्सियां खाली देख नेपाली कांग्रेस के सांसद गोपाल शर्मा ने मोर्चा संभाला. उन्होंने ‘प्रतिनिधि सभा नियमावली’ का हवाला देते हुए इस पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई:

  • क्या है नियम 6(5): सांसद गोपाल शर्मा ने नियम 6 की उपधारा (5) का उल्लेख करते हुए अध्यक्ष को बताया कि नियमावली के अनुसार, जब भी सदन में किसी विशिष्ट मंत्रालय के बजटीय आवंटन या विषय पर चर्चा चल रही हो, तो संबंधित मंत्री की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य है.

  • सिर्फ 3 मंत्री थे मौजूद: सांसद ने अध्यक्ष का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि चर्चा नौ मंत्रालयों पर होनी है, लेकिन सदन में सरकार की तरफ से केवल तीन मंत्री ही उपस्थित हैं.

सदन में मौजूद रहने वाले मंत्री: मंगलवार की बैठक में केवल भौतिक अवसंरचना मंत्री सुनिल लम्साल, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवप्रवर्तन मंत्री महावीर पुन, और ऊर्जा मंत्री विराजभक्त श्रेष्ठ ही अपनी बेंचों पर उपस्थित थे. 나머지 6 मंत्रालयों के मंत्री गायब थे.

सरकार पर संसद की उपेक्षा का आरोप, बैठक स्थगित

अध्यक्ष डोल प्रसाद अर्याल से व्यवस्था की मांग करते हुए सांसद शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया, “सरकार लगातार लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संसद की उपेक्षा कर रही है. सदन का संचालन स्वेच्छा से नहीं बल्कि नियमावली के नियमों के तहत ही किया जाना चाहिए.”

विपक्ष के तर्कों और मंत्रियों की भारी कमी को देखते हुए प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष डोल प्रसाद अर्याल ने नियमों को सर्वोपरि माना और मंत्रियों को सदन में बुलाने की व्यवस्था देने के बजाय स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रतिनिधि सभा की कार्यवाही को स्थगित करने की घोषणा कर दी. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर नेपाल में कार्यपालिका और विधायिका के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है.

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