बाप रे बाप, 500 करोड़ से भी अधिक कैश सांसद धीरज साहू के ठिकानों से मिला, अब तक गिनती जारी

बिरसा भूमि लाइव

  • 40 नोट गिनने की मशीन मंगायी गयी है
  • बरामद कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल सहित अन्य उपकरणों की भी जांच होगी

रांची : राज्यसभा सांसद धीरज साहू के ठिकाने पर पांचवे दिन भी आयकर विभाग की रेड जारी है। अभी तक 40 बैग के पैसों की ही गिनती पूरी हो पाई है। 136 बैग में रखे नोटों की गिनती जारी है। शनिवार तक 40 बैग से 300 करोड़ रुपये की गिनती की जा चुकी थी। अब अनुमान है कि बरामद कैश का आंकड़ा 400 करोड़ के पार जा सकता है। नोटों की गिनती आज पूरी की जा सके इसके लिए अधिक काउंटिंग मशीनें और मैनपावर लगाए गए हैं। मशीन लगातार खराब हो रही थी। इसे ठीक करने के लिए इंजीनियर भी मुस्तैद हैं। कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 50 कर दी गयी है। 25 मशीनों से नोटों की गिनती की जा रही है। बताया गया है कि सांसद धीरज साहू के ठिकानों से जितनी नकदी मिल रही है, उनकी पूरी गिनती होने पर आंकड़ा 800-1000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

बलांगीर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा में यह रकम लाकर रखी गयी है। उम्मीद है कि जल्द ही सटीक आंकड़े स्पष्ट हो जायेंगे। उधर, हैदराबाद से आयकर विभाग की 25 सदस्यीय एनालिस्ट टीम पहुंच चुकी है। यह टीम डिजिटल तथ्यों की जांच करेगी, जिन ठिकानों पर आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की है, वहां से बरामद कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल सहित अन्य उपकरणों की भी जांच होगी।

कुल मिलाकर आयकर विभाग के चार दिनों की छापेमारी में 500 करोड़ से भी अधिक कैश मिले हैं। आयकर विभाग की टीम ने 6 दिसंबर को धीरज साहू के लोहरदगा, रांची और ओडिशा के कई ठिकानों पर छापा मारा था। 7 दिसंबर को धीरज साहू के ओडिशा के आवास से 30 अलमारियां मिली, जिसमें नोट भरे थे। वहीं, 8 दिसंबर को धीरज साहू के घर से नोटों से भरे 156 बैग्स बरामद किए गए। 9 दिसंबर को बैग्स की संख्या बढ़कर 176 हो चुकी है।

इधर, भाजपा मामले को लेकर लगातार कांग्रेस और झारखंड में हेमंत सरकार पर निशाना साध रही है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोप लगाया है कि उक्त राशि कांग्रेस व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की है। इस पर कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ प्रदीप कुमार बलमुचू ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि धीरज साहू खानदानी बिजनेसमैन हैं। जब्त राशि उनकी जायज कमाई की है। बाबूलाल मरांडी प्रधानमंत्री से मांग करनी चाहिए कि 300 करोड़ मिलने के मामले की ईडी या सीबीआइ से जांच करवान ताकि यह पता चल सके कि आखिर ये पैसे किसके हैं।

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