झारखंड में बालू खनन को लेकर सरकार को एक बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि बालू घाटों पर लगी रोक को हटाया जाए, लेकिन न्यायालय ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया।
मुख्य विवरण
-
झारखंड हाई कोर्ट की बेंच — चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर — ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि सरकार को आदेश मानने की बजाय केवल सुनने का रवैया नहीं अपनाना चाहिए।
-
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले सरकार को पेसा (PESA) कानून की नियमावली तैयार कर प्रस्तुत करनी होगी।
-
इस मामले में सरकार ने हस्तक्षेप याचिका दायर कर कहा था कि बालू घाटों की नीलामी और आवंटन पर लगी रोक को हटाया जाए — लेकिन अदालत ने ऐसा करने से इंकार कर दिया।
-
मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, और उस दिन अदालत इस याचिका पर पुनर्विचार कर सकती है।
-
याचिका दाता पक्ष का तर्क है कि जुलाई 2024 में कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि दो महीने के भीतर पेसा नियमावली बनाए और लागू करें, लेकिन सरकार अब तक इसमें विफल रही है।
-
इस दौरान, राज्य में लगभग 440 घाटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे याचिकाकर्ता पक्ष ने पेसा अधिनियम के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया है।
इस निर्णय से स्पष्ट संकेत मिलता है कि न्यायालय इस मामले में सख्ती बरतेगा और सरकार से ज्यादा जवाबदेही की मांग करेगा। अगले सुनवाई में क्या मोड़ आएगा, यह देखने वाली बात होगी।


