रांची: झारखंड में लंबे समय से रिक्त चल रहे लोकायुक्त के पद पर आखिरकार नियुक्ति कर दी गई है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता के नाम पर अपनी मुहर लगा दी है। राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद अब जल्द ही उनके शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कौन हैं जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता?
जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता का न्यायिक करियर बेहद शानदार रहा है:
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न्यायिक सेवा की शुरुआत: 1997 में उन्होंने न्यायिक सेवा में प्रवेश किया और संयुक्त बिहार के समय अपर जिला जज (ADJ) के रूप में कार्य किया।
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चर्चित मामले: उन्होंने बहुचर्चित चारा घोटाला केस की भी सुनवाई की थी।
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उच्च न्यायालय: वर्ष 2013 में वे झारखंड हाईकोर्ट के जज बने और 30 मई 2021 को सेवानिवृत्त हुए।
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महत्वपूर्ण पद: सेवानिवृत्ति के बाद वे झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष और आरआरडीए ट्रिब्यूनल के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
क्यों अहम है यह नियुक्ति?
झारखंड में लोकायुक्त का पद फरवरी 2022 से ही खाली पड़ा था। पूर्व लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय के असामयिक निधन के बाद से राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई ठप थी।
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वर्तमान में लोकायुक्त कार्यालय में 4,000 से अधिक आवेदन लंबित हैं।
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जस्टिस गुप्ता के कार्यभार संभालने से इन लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया: एक नजर में
लोकायुक्त एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। इसकी नियुक्ति एक उच्चस्तरीय समिति की सिफारिश पर की जाती है:
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चयन समिति: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली इस समिति में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं।
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शपथ: राज्यपाल या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्ति पद की गोपनीयता की शपथ दिलाते हैं।
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कार्यकाल: लोकायुक्त का कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक होता है।

