नवादा । नवादा जिले के जनता दल यूनाइटेड जिला अध्यक्ष के चुनाव में रविवार की शाम को पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के बीच जूतमपैजार की स्थिति उत्पन्न हो गई ।चुनाव स्थल जंग के मैदान में तब्दील हो गया, जिसके बाद चुनाव प्रभारी हरि कृपाल ने चुनाव को स्थगित कर गुंडागर्दी के विरुद्ध पार्टी नेताओं से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री गुंडागर्दी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे तथा उनका फैसला अंतिम होगा ।वर्तमान जिला कमेटी भी भंग कर दी गई।
पार्टी कार्यालय में समर्थकों के बीच जमकर धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट हुई। हंगामे की गंभीरता को देखते हुए निर्वाचन पदाधिकारी (पर्यवेक्षक) हरि कृपाल ने पूरी चुनाव प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया और वर्तमान जिला कमेटी को भंग घोषित कर दिया। अब नवादा में जदयू का कोई जिला अध्यक्ष नहीं है और सबकी नजरें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अगले फैसले पर टिकी हैं।
15 दावेदारों के बीच वर्चस्व की जंग
जिला अध्यक्ष की कुर्सी के लिए इस बार कुल 15 उम्मीदवारों ने ताल ठोंकी थी, जिनमें मनोज सिंह, सुरेश सिंह, संतोष कुमार सिन्हा और डॉ. राजीव रंजन जैसे दिग्गज नाम शामिल थे। प्रक्रिया के अनुसार, जिले के 17 प्रखंड अध्यक्षों को मतदान करना था। पर्यवेक्षक हरि कृपाल ने बताया कि नामांकन जांच के बाद पार्टी आलाकमान के निर्देशानुसार सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की जा रही थी। जैसे ही सर्वसम्मति के लिए हस्ताक्षर लेने की प्रक्रिया शुरू हुई, विकास सिंह नामक एक युवक ने हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने पर्यवेक्षक के साथ अभद्रता की और उन्हें चैंबर से बाहर खींचने की कोशिश की।
घटना से मर्माहत पर्यवेक्षक हरि कृपाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके और उनकी पत्नी (जो स्वयं उम्मीदवार थीं) के सामने अपशब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, ‘ऐसी गुंडागर्दी असहनीय है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर बंद कमरे में ऐसी घटना हो सकती है, तो बाहर सुरक्षा की क्या गारंटी?’ उन्होंने पुलिस प्रशासन पर भी सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया।
भारी पुलिस बल तैनात, सुरक्षा पर उठे सवाल
हंगामे की सूचना मिलते ही नगर थाना प्रभारी उमाशंकर सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। जदयू कार्यालय के पास विधायक कार्यालय होने के बावजूद इतनी बड़ी सुरक्षा चूक ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस घटना ने जदयू के आंतरिक लोकतंत्र और अनुशासन की कमी को उजागर किया है। फिलहाल, पूरी रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय भेज दी गई है, जहाँ से अनुशासनहीनता करने वालों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।


