नई दिल्ली | केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए लाए गए विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। 193 सांसदों के हस्ताक्षर वाले इस नोटिस के गिरने से विपक्षी गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है।
193 सांसदों ने किया था हस्ताक्षर
विपक्ष ने एकजुट होकर चुनाव आयोग के शीर्ष पद पर सवाल उठाते हुए यह मोर्चा खोला था. इस प्रस्ताव पर लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। यह प्रस्ताव संविधान के अनुच्छेद 324(5), चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 और जज (जांच) अधिनियम 1968 की विभिन्न धाराओं के तहत लाया गया था।
स्पीकर और सभापति ने क्यों किया खारिज?
लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी पहलुओं और संवैधानिक प्रावधानों का गहन अध्ययन करने के बाद यह निर्णय लिया।
विशेषाधिकार: अध्यक्ष ने ‘जज (जांच) अधिनियम 1968’ की धारा 3 के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए इस नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
राज्यसभा का रुख: राज्यसभा बुलेटिन में भी स्पष्ट किया गया कि सभापति ने विचार-विमर्श के बाद इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।
गरमाई राजनीति: जयराम रमेश का सरकार पर हमला
प्रस्ताव खारिज होने के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया (X) पर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का जिक्र करते हुए तंज कसा। “हम जानते हैं कि राज्यसभा के पिछले चेयरमैन के साथ क्या हुआ था, जिन्होंने विपक्ष की याचिका स्वीकार की थी।”
गौरतलब है कि पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ ने पिछले साल जुलाई में स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाता रहा है।
क्या है मामला?
विपक्ष पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और नियुक्तियों को लेकर सवाल उठा रहा है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाया गया यह महाभियोग इसी कड़ी का हिस्सा था, लेकिन संसद के दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों के फैसले के बाद अब यह मामला फिलहाल ठंडे बस्ते में जाता दिख रहा है।

