विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले स्थित मिनी जगन्नाथपुरी के नाम से प्रसिद्ध मानोरा धाम में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। भगवान जगदीश स्वामी, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा 22 फीट ऊंचे दो मंजिला लकड़ी के रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। रथयात्रा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली रथयात्रा
सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भगवान के विग्रहों को मंदिर के गर्भगृह से रथ पर विराजित किया गया। इसके बाद रथयात्रा पूरे गांव में निकाली गई। विदिशा समेत आसपास के कई जिलों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना, आरती और पुष्पवर्षा कर रथयात्रा का स्वागत किया।
पूरे मानोरा गांव को रंग-बिरंगी रोशनी, ध्वज-पताकाओं और आकर्षक सजावट से सजाया गया है। रथयात्रा शाम तक जनकपुरी पहुंचेगी, जहां भगवान रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन रथ को वापस मंदिर परिसर लाया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं और पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। यहां तीन दिन तक मेले का आयोजन होगा।
200 साल पुरानी है परंपरा
मानोरा धाम की रथयात्रा करीब 200 वर्ष पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि जगन्नाथपुरी में रथयात्रा के दौरान जब भगवान का रथ कुछ समय के लिए रुकता है, तब भगवान मानोरा धाम पधारते हैं। इसी विश्वास के साथ यहां हर वर्ष भव्य रथयात्रा निकाली जाती है।
किंवदंती के अनुसार, लगभग 200 वर्ष पहले मानोरा के भक्त मानकचंद्र और उनकी पत्नी पदमावती की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान जगन्नाथ ने प्रतिवर्ष मानोरा आकर दर्शन देने का वचन दिया था। तभी से आषाढ़ शुक्ल द्वितीया पर यहां रथयात्रा निकालने की परंपरा आज भी निभाई जा रही है।
