रांची । झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े बहुचर्चित पेपर लीक (प्रश्नपत्र लीक) मामले के छह मुख्य आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर शुक्रवार को रांची के अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष (सरकारी पक्ष) की ओर से मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की गई। अभियोजन के इस आग्रह को स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी सोमवार, 1 जून की तिथि निर्धारित की है।
जमानत की आस में सॉल्वर गैंग के कथित एजेंट
इस चर्चित मामले में जिन आरोपितों ने अदालत से नियमित जमानत की गुहार लगाई है, उनमें विकास कुमार, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद समेत छह लोग शामिल हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन छह लोगों में से तीन आरोपित कथित ‘पेपर सॉल्वर गिरोह’ के सक्रिय एजेंट के रूप में चिन्हित किए गए हैं। पुलिस अनुसंधान में इनकी भूमिका परीक्षा शुरू होने से ठीक पहले अभ्यर्थियों को अवैध रूप से प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उत्तर हल करने वाले (सॉल्विंग) नेटवर्क को संचालित करने में मुख्य रूप से सामने आई है। इससे पहले की सुनवाई में मामले के अनुसंधानकर्ता (आईओ) ने अदालत के समक्ष आरोपितों का पुराना आपराधिक इतिहास और केस डायरी प्रस्तुत की थी।
पूर्व में मिल चुकी है 150 से अधिक लोगों को जमानत
उल्लेखनीय है कि इस व्यापक पेपर लीक मामले की न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब तक 150 से अधिक अन्य आरोपितों को विभिन्न अदालतों से जमानत मिल चुकी है। हालांकि, पुलिस और जांच एजेंसियां मामले की गंभीरता को देखते हुए अब भी लगातार कई गोपनीय बिंदुओं पर अनुसंधान कर रही हैं। वर्तमान में तमाड़ थाना में इस पूरे प्रकरण को लेकर कांड संख्या 21/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसके आधार पर जांच एजेंसियां मुख्य सरगनाओं, सॉल्वर गैंग के नेटवर्क और पर्दे के पीछे शामिल अन्य रसूखदार लोगों की भूमिका को पूरी तरह खंगालने में जुटी हुई हैं।
तमाड़ के रड़गांव में छापेमारी कर हुआ था भंडाफोड़
इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ गत 11 अप्रैल की रात को हुआ था, जब पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित मकान में भारी संख्या में परीक्षार्थियों का संदिग्ध जमावड़ा लगा हुआ है। सूचना के तत्काल बाद गठित पुलिस की विशेष छापेमारी दल ने देर रात उक्त भवन की घेराबंदी की। पुलिस की धमक पाते ही मौके पर मौजूद अभ्यर्थियों और एजेंटों में अफरा-तफरी मच गई और लोग भागने लगे। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए घटना स्थल से ही कुल 166 लोगों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया था, जिसके बाद जांच के क्रम में इन मुख्य साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारियां संभव हो सकी थीं।
