खूंटी । जिले में आगामी खरीफ मौसम और कम वर्षा की संभावित स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को जिला स्तरीय खरीफ कार्यशाला-सह-किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया के निर्देश पर संयुक्त कृषि भवन के सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में वैज्ञानिक खेती, वैकल्पिक फसल और आधुनिक कृषि तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को ऐसी फसलों के प्रति जागरूक करना था, जिन्हें कम वर्षा की स्थिति में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सके। कृषि वैज्ञानिक और विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने किसानों को आकस्मिक फसल योजना, वैकल्पिक खेती और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि बदलते मौसम और अनियमित वर्षा को देखते हुए खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ नई तकनीकों को अपनाना जरूरी है।
पशुपालन विभाग ने चारा की उपलब्धता, पशुओं के टीकाकरण और पशुधन संरक्षण की जानकारी साझा की। वहीं मत्स्य विभाग ने किसानों को मत्स्य पालन से होने वाले आर्थिक लाभ, प्रशिक्षण और विभागीय योजनाओं से अवगत कराया। भूमि संरक्षण विभाग की ओर से जल संरक्षण और भूमि विकास से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा की गई।
उद्यान विभाग के प्रतिनिधियों ने हल्दी, अदरक और ओल जैसी कंद फसलों की वैज्ञानिक खेती की विधि और उससे मिलने वाले लाभों की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने मिट्टी जांच के महत्व पर जोर देते हुए बताया कि सही मिट्टी परीक्षण से बेहतर उत्पादन संभव है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिला परिषद अध्यक्ष मसीह गुड़िया ने किसानों से वैज्ञानिकों की ओर से दी गई जानकारी को अपनाने की अपील की।
इस अवसर पर कृषि, पशुपालन, मत्स्य, उद्यान, भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, एफपीओ प्रतिनिधि, कृषक मित्र एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित थे।

