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Wednesday, June 10, 2026

धनबाद में फिर फटी धरती: तेज धमाके के साथ बना बड़ा ‘गोफ’, चपेट में आए 3 घर; दहशत में लोग

धनबाद । झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र धनबाद से एक बार फिर डराने वाली खबर सामने आई है। जिला के केंदुआडीह थाना क्षेत्र स्थित गैस रिसाव और भू-धंसान (Land Subsidence) प्रभावित इलाके में सोमवार को अचानक जमीन धंसने की बड़ी घटना हुई है। केंदुआ गोधर 6 नंबर स्थित ‘हवा चानक’ के पास अचानक तेज आवाज के साथ धरती फट गई और एक विशालकाय ‘गोफ’ (गहरा गड्ढा) बन गया। इस भू-धंसान की जद में आने से तीन घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसके बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

जोरदार धमाके से हिली जमीन, घरों में आईं बड़ी दरारें
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सोमवार को अचानक एक जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। लोग जब डरकर अपने घरों से बाहर भागे, तो देखा कि जमीन का एक बहुत बड़ा हिस्सा नीचे धंस चुका था और वहां से जहरीली गैस का रिसाव हो रहा था। इस धंसान के कारण पास में बने तीन मकानों की दीवारें और फर्श फट गए और उनमें बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन प्रभावित परिवारों के बीच भारी दहशत का माहौल है।

बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन पर भड़के लोग, पुनर्वास न मिलने से नाराजगी
हादसे के शिकार हुए परिवारों ने आनन-फानन में अपने घरों का कीमती सामान बाहर निकाला और सुरक्षित जगहों की ओर भागे। पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है “यह पूरा इलाका लंबे समय से भूमिगत आग, गैस रिसाव और भू-धंसान की बेहद संवेदनशील जद में है। हमने कई बार बीसीसीएल (BCCL) प्रबंधन से हमें सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने और पुनर्वास (Rehabilitation) की गुहार लगाई है, लेकिन प्रबंधन की कान पर जूं तक नहीं रेंगती। हर बार सिर्फ खोखला आश्वासन मिलता है और आज नतीजा सबके सामने है।”

खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवार, जांच में जुटा प्रशासन
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासनिक टीम अलर्ट मोड पर आई। अंचल अधिकारी (CO) विकास आनंद ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि भू-धंसान की सूचना मिलते ही राजस्व उपनिरीक्षक को मौके पर भेजा गया है। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है और स्थिति का सटीक आकलन करने के बाद प्रभावितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

फिलहाल, बेघर हुए प्रभावित परिवार किसी तरह खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। जमीन के अंदर सुलग रही कोयले की आग और कभी भी दोबारा बड़ा हादसा होने की आशंका से पूरा गोधर इलाका सहमा हुआ है।

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