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Saturday, April 18, 2026

सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी का नक्सलियों को चेतावनी, एक महीने में करे सरेंडर, वरना होगी निर्णायक कार्रवाई

पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के विशेष महानिदेशक ) स्पेशल डीजी) दीपक कुमार ने बालिबा गांव स्थित 193 बटालियन कैंप का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कैंप में तैनात जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया और जमीनी स्तर पर चल रहे ऑपरेशन की विस्तृत समीक्षा की।

स्पेशल डीजी ने करीब दो घंटे तक कैंप में रुककर सुरक्षा रणनीतियों, ऑपरेशनल चुनौतियों और जवानों की आवश्यकताओं पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा की। निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ सख्त रुख का संकेत देते हुए कहा कि सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए एक महीने का अंतिम मौका दिया गया है। यदि वे इस अवधि में सरेंडर नहीं करते हैं, तो सुरक्षा बल उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में एंटी-नक्सल अभियान को तेज कर दिया गया है और आने वाले समय में सारंडा को नक्सलमुक्त बनाने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आएंगे।

सीआरपीएफ के अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में इलाके में करीब 45 से 50 नक्सली सक्रिय हैं, लेकिन अब तक किसी भी संगठन की ओर से आत्मसमर्पण की पहल नहीं हुई है।

दौरे के दौरान सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे, रांची डीआईजी सतीश लिंडा, सीआरपीएफ डीआईजी विनोद कार्तिक, कमांडेंट ओम जी शुक्ला और पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने संयुक्त रूप से क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशनों की समीक्षा कर आगे की रणनीति तय की।

इस बीच हेलीपैड पर एक अप्रत्याशित घटना ने कुछ समय के लिए अफरातफरी मचा दी। कोबरा 205 बटालियन के जवान अनिल बिस्वाल, जो पहले से मलेरिया से पीड़ित थे, अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद साथियों और मेडिकल टीम ने तुरंत प्राथमिक उपचार दिया और उन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए बेहतर इलाज के लिए भेजा गया।

जानकारी के अनुसार, कुल सात बीमार जवानों को एयरलिफ्ट कर इलाज के लिए भेजा गया है और सभी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

उल्लेखनीय है कि सारंडा क्षेत्र लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के लिए संवेदनशील रहा है। घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां सुरक्षा बलों के लिए अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण रहता है। हालांकि, हाल के वर्षों में लगातार अभियानों के चलते नक्सल गतिविधियों में कमी आई है और सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सलमुक्त हो सकता है।

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