बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जोरदार जीत के बाद भाजपा ने तुरंत ही पश्चिम बंगाल को अपना अगला राजनीतिक लक्ष्य घोषित कर दिया है। पार्टी के समर्थन में बने माहौल को भुनाने की योजना के हिस्से के रूप में, भाजपा ने झारखंड के उन जिलों में सक्रियता बढ़ाने का निर्णय लिया है जो पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे हुए हैं।
विशेष रूप से धनबाद, बोकारो और संतालपरगना जैसे झारखंड के इलाके पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्धमान, पुरुलिया, मालदा और वीरभूम जैसे जिलों से जुड़े हैं। इसलिए भाजपा ने इन सीमावर्ती झारखंडी जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को बंगाल विधानसभा चुनावी मोर्चे पर लगाने का निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि कई स्तरों पर समिति बनाई गई है, और जिम्मेदारियों को बांटा गया है ताकि झारखंड में मौजूद सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संपर्कों का राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।
पार्टी का मानना है कि झारखंड-बंगाल सीमावर्ती क्षेत्रों में सांस्कृतिक जुड़ाव, रोज़मर्रा का संपर्क और आर्थिक लेन-देन भाजपा के लिए चुनावी जमीन मजबूत करने में मदद करेगा। धनबाद और कोयलांचल में बंगाली समुदाय की व्यापक उपस्थिति और आर्थिक संबंध भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इसके साथ ही, भाजपा यह भी देख रही है कि संथाली नेताओं को पश्चिम बंगाल के चुनाव में उपयोग करके वह संथाल वोटर बेस पर पकड़ बना सके — खासकर उन सीटों पर जहाँ संथाल मतदाता महत्वपूर्ण संख्या में हैं। हालांकि, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) का संथालों पर पहले से ही प्रभाव है, और यदि टीएमसी को झामुमो का समर्थन मिलता है, तो यह भाजपा के लिए चुनौतिपूर्ण हो सकता है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में 2026 के मार्च-अप्रैल के विधानसभा चुनाव को देखते हुए अभी से ही अपनी रणनीति को सक्रिय कर रही है। बिहार में मिली सफलता को पार्टी बंगाल में एक लंबी जीत की शुरुआत के रूप में देख रही है — जहाँ वह अपने सीमावर्ती नेटवर्क और स्थानीय संपर्कों का भरपूर उपयोग करने का प्लान बना रही है।


