रांची । झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव (PA) संजीव कुमार लाल के लिए आज राहत भरी खबर आई है। करोड़ों रुपये के टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद आलमगीर आलम को झारखंड हाई कोर्ट ने नियमित जमानत (Regular Bail) दे दी है।
अदालत का फैसला
न्यायमूर्ति की अदालत में हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। आलमगीर आलम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने खराब स्वास्थ्य और जांच में सहयोग का हवाला दिया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए बेल दे दी। उनके साथ ही उनके पीए संजीव कुमार लाल को भी अदालत से राहत मिली है।
क्या है पूरा मामला?
ज्ञात हो कि मई 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने संजीव लाल और उनके घरेलू सहायक के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहाँ से 32 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद हुई थी। इस मामले की कड़ी जुड़ते हुए ED ने आलमगीर आलम को पूछताछ के लिए बुलाया था और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
आरोप: ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर के बदले कमीशन लेने और अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप।
हिरासत: आलमगीर आलम पिछले कई महीनों से रांची की बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होतवार जेल) में बंद थे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
विधानसभा चुनावों और राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति के बीच आलमगीर आलम की रिहाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थकों में खुशी की लहर है, वहीं विपक्षी दल इस पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

