रांची। झारखंड के पूर्व सीएम और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) की पोस्टिंग को लेकर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक व्यवस्था का मज़ाक बताया है। शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में मरांडी ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कई पुलिस अधिकारियों को प्रमोशन मिलने के बावजूद वर्षों तक पोस्टिंग नहीं दी गई। वहीं, कुछ अधिकारियों को उनकी सेवानिवृत्ति से महज 24 घंटे पहले डीएसपी पद पर तैनात कर दिया गया।
मरांडी ने यह भी कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के माध्यम से चयनित 7वीं से 10वीं बैच के 39 डीएसपी अब तक पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि डीएसपी बनने की योग्यता क्या है और डीएसपी बनने के बाद पोस्टिंग देने का मापदंड क्या तय किया गया है। नेता प्रतिपक्ष ने कुछ अधिकारियों की कार्यशैली और चरित्र पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पुलिस विभाग की साख प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी आदिवासी महिला दारोगा रूपा तिर्की की मौत के बाद चरित्र हनन में शामिल रहे या अन्य मामलों में अपनी जिम्मेदारियों से बचते नजर आए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि करीब सात महीने पहले इंस्पेक्टर से डीएसपी बने चार अधिकारियों को, जो लंबे समय से पोस्टिंग का इंतजार कर रहे थे, उनकी सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले शुक्रवार को स्पेशल ब्रांच में पोस्टिंग दी गई। इन अधिकारियों में अखिलेश प्रसाद मंडल, सरोज कुमार सिंह, शैलेश प्रसाद और विनोद उरांव शामिल हैं। ये सभी अधिकारी शनिवार को सेवानिवृत्त भी हो गए।


