पूर्वी सिंहभूम । भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एटीएम केंद्रों पर वर्षों से कार्यरत सुरक्षा गार्डों की नौकरी पर संकट गहराता जा रहा है। नई सुरक्षा एजेंसी सीआईएसएस के आने के बाद बड़ी संख्या में सुरक्षा कर्मियों को कार्य से हटाए जाने के विरोध में प्रभावित गार्डों ने जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की है।
वर्षों से कर रहे थे सेवा
सुरक्षा गार्डों ने विधायक को बताया कि वे पिछले 10 से 15 वर्षों से एसबीआई के विभिन्न एटीएम केंद्रों की सुरक्षा में तैनात थे। एजेंसी बदलने के बाद करीब 140 गार्डों को बिना स्पष्ट कारण बताए काम से हटा दिया गया, जिससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
आंदोलन के बाद भी नहीं मिला समाधान
गार्डों के अनुसार, नौकरी जाने के बाद उन्होंने संगठित होकर आंदोलन शुरू किया और कई दिनों तक धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास भी किया। बाद में उनके आंदोलन को झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं का भी समर्थन मिला, लेकिन इसके बावजूद बहाली का रास्ता नहीं निकल सका।
सरयू राय से लगाई गुहार
लगातार प्रयासों के बावजूद सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने पर सुरक्षा गार्डों का प्रतिनिधिमंडल असंगठित क्षेत्र मजदूर प्रकोष्ठ के प्रतिनिधि अमित शर्मा के साथ विधायक सरयू राय से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि विधायक के हस्तक्षेप से एजेंसी और बैंक प्रबंधन के साथ सार्थक बातचीत हो सकेगी।
विधायक ने दिया आश्वासन
मामले को गंभीरता से लेते हुए सरयू राय ने सुरक्षा गार्डों को आश्वस्त किया कि वे संबंधित एजेंसी और एसबीआई अधिकारियों से बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी लेंगे और समाधान निकालने का प्रयास करेंगे। अमित शर्मा ने बताया कि विधायक सोमवार को सीआईएसएस एजेंसी के प्रतिनिधियों से भी चर्चा करेंगे।
छंटनी और कम वेतन पर भर्ती का आरोप
अमित शर्मा ने आरोप लगाया कि पहले भी सुरक्षा एजेंसियां बदलती रही हैं, लेकिन कर्मचारियों की सेवाएं जारी रहती थीं। इस बार नई एजेंसी आने के बाद बड़े पैमाने पर छंटनी की गई है और कम वेतन पर नए लोगों की नियुक्ति की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि नौकरी छूटने से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण एक महिला सुरक्षा गार्ड के पति की सदमे में मृत्यु हो गई थी।
