जमशेदपुर/पूर्वी सिंहभूम | जिले में मनरेगा के तहत तकनीकी सहायक (कनीय अभियंता समकक्ष) के पदों पर हुई संविदा आधारित नियुक्ति विवादों के घेरे में आ गई है। अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने वर्तमान मेधा सूची को रद्द कर योग्यता के आधार पर नई सूची जारी करने की मांग की है।
प्रमाणपत्रों की वैधता पर गंभीर सवाल
विज्ञापन संख्या 01/2023-24 के तहत हुई इस नियुक्ति में अभ्यर्थियों ने कई तकनीकी खामियां उजागर की हैं। नियमों के अनुसार पीजीडीसीए या कंप्यूटर डिप्लोमा मान्यता प्राप्त संस्थान से होना अनिवार्य था। आरोप है कि कई चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कुछ मामलों में अभ्यर्थियों का पीजीडीसीए सर्टिफिकेट उनके स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री से भी पहले का है, जो सामान्य शैक्षणिक नियमों के विरुद्ध प्रतीत होता है। शिकायत के अनुसार, कुछ चयनित अभ्यर्थी पहले से ही अन्य सरकारी विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन उन्होंने शपथ पत्र में इस जानकारी को छिपाकर नियुक्ति प्राप्त की है।
जांच के घेरे में विशेष मामले
अभ्यर्थियों ने आवेदन संख्या 623228338149 का विशेष उल्लेख किया है, जिसमें डिप्लोमा (2013), बीटेक (2017) और पीजीडीसीए (2015) दर्शाया गया है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि डिग्री के बीच में डिप्लोमा का यह क्रम संदिग्ध है। शिकायत में शीतल महापात्र, अनुपम साहू और अभिजीत बेरा जैसे नामों की गहन जांच की मांग की गई है।
“निर्धारित पदों के बावजूद सभी पर नियुक्ति नहीं की गई और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के चयन में भी स्पष्टता नहीं है। अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो योग्य उम्मीदवारों के साथ बड़ा अन्याय होगा।”
— प्रियंका डबलिन एवं सिद्धार्थ ग्लुश (अभ्यर्थी)
उपायुक्त से पारदर्शी कार्रवाई की उम्मीद
मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे अभ्यर्थियों ने मांग की है कि शपथ पत्र की शर्तों का उल्लंघन करने वालों की नियुक्ति तुरंत निरस्त की जाए और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई हो। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि क्या इस भर्ती प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा की जाएगी।

