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Wednesday, March 4, 2026

स्वास्थ्य मंत्री के बयान असंवैधानिक, झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल: राफिया नाज़

रांची। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रवक्ता राफिया नाज़ ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को बदहाल बताते हुए स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
सोमवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राफिया नाज़ ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के हालिया बयान न केवल जनता को भ्रमित कर रहे हैं, बल्कि संविधान, सेवा नियमों और कानून की मूल भावना पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि पद की गरिमा और संवैधानिक मर्यादाओं की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। हर मंत्री संविधान और गोपनीयता की शपथ लेता है, इसके बावजूद स्वास्थ्य मंत्री का यह दावा करना कि वे तीन लाख रुपये प्रतिमाह वेतन पर नौकरी दिला सकते हैं या मनचाही पोस्टिंग करा सकते हैं, पूरी तरह असंवैधानिक है। कानून में किसी मंत्री को सीधे नौकरी देने या पैसे अथवा प्रभाव के आधार पर नियुक्ति कराने का कोई प्रावधान नहीं है।
राफिया नाज़ ने कहा कि यदि कोई मंत्री इस तरह संविधान और सेवा नियमों का उल्लंघन करता है, तो वह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 13(1)(ए) के तहत पद के दुरुपयोग का दोषी माना जाता है। साथ ही धारा 13(2) के अंतर्गत चार से दस वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जो मंत्री, विधायक और अधिकारियों सभी पर समान रूप से लागू होता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नौकरी देने की इतनी व्यवस्था उपलब्ध है, तो सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए बच्चों के परिजनों को नौकरी क्यों नहीं दी गई? राफिया नाज़ ने यह भी मांग की कि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा अपने वेतन से एक लाख रुपये मुआवज़ा देने की घोषणा यदि वास्तव में लागू की गई है, तो उसका सार्वजनिक विवरण सामने आना चाहिए।
रूबिका पहाड़िया की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल किया कि पीड़ित परिवार को कितना मुआवज़ा दिया गया और सरकार या मंत्री की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक बयान क्यों नहीं दिया गया?
राफिया नाज़ ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री रील और बयानबाज़ी में अधिक व्यस्त हैं, जबकि ज़मीनी सच्चाई यह है कि झारखंड में एंबुलेंस जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा भी आम लोगों को समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही है। उन्होंने चाईबासा में चार महीने की बच्ची की मौत का हवाला देते हुए कहा कि बच्ची की मौत केवल एंबुलेंस न मिलने के कारण हुई, लेकिन मंत्री उसकी उम्र को लेकर बहस करते रहे। उन्होंने कहा कि बच्चा चार दिन का हो, चार महीने का या चार साल का—इस तरह की संवेदनहीन बयानबाज़ी शर्मनाक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ज़मीनी हकीकत से कट चुकी है और मानवीय संवेदनाओं से दूर होती जा रही है। ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में हालात बेहद भयावह हैं। लोग इलाज के लिए अपनी सीमित आय खर्च करने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री ग्राम बस योजना ज़मीन पर कहीं नजर नहीं आती। आदिवासी क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। गुमला, सिमडेगा, चाईबासा, रांची सहित कई जिलों में समय पर एंबुलेंस न मिलने से लोगों की जान जा रही है। कई स्थानों पर टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन किए जाने और समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं।
राफिया नाज़ ने कहा कि जेलों में बंद महिला कैदियों के लिए नर्स तक उपलब्ध नहीं है और कई मौतें केवल एंबुलेंस न मिलने की वजह से हो गईं। उन्होंने इसे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की घोर विफलता करार दिया।
थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी पॉज़िटिव रक्त चढ़ाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यह स्वास्थ्य सुरक्षा में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। साथ ही अवैध कफ सिरप के ठिकानों पर छापेमारी में बड़ी संख्या में बोतलों की बरामदगी और गिरफ्तारियां यह संकेत देती हैं कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत अवैध गतिविधियां बेखौफ चल रही हैं।
स्वास्थ्य बजट पर सवाल उठाते हुए राफिया नाज़ ने कहा कि राज्य का कुल स्वास्थ्य बजट लगभग 7,427.50 करोड़ रुपये है और इसके अलावा 729 करोड़ रुपये का सप्लीमेंट्री बजट भी है, लेकिन उनके आकलन के अनुसार ज़मीनी स्तर पर दस प्रतिशत से अधिक राशि का प्रभावी उपयोग नहीं हो पा रहा है।
अंत में उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर मंत्री मुस्लिम आयुष डॉक्टर को नौकरी देने की बात करते हैं, तो दूसरी ओर मुस्लिम बेटी के योग करने को अंग-प्रदर्शन बताया जाता है। यह दोहरा रवैया न केवल सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के भी खिलाफ है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को रील, बयान और खोखले वादों की नहीं, बल्कि एक जवाबदेह, संवेदनशील और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरत है।

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