देश की सीमाओं की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले पूर्व सैनिक अब समाज में सेवा की नई पहल कर रहे हैं। रविवार को अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद और राष्ट्रीय चेतना संस्थान की ओर से गांधी घाट पर विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें पूर्व सैनिकों ने नदी जल और पर्यावरण की रक्षा को अपना नया संकल्प घोषित किया। महापर्व के विसर्जन कार्यक्रम के बाद घाट पर फैले कचरे को स्वयं से साफ करते हुए पूर्व सैनिकों और संस्थान के सदस्यों ने पानी में फेंकी गई मूर्तियों के अवशेष, प्लास्टिक और सजावट सामग्री को बाहर निकाला। उनका उद्देश्य था कि जल स्रोत पूरी तरह से स्वच्छ रहे और प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को हटाकर जलजीवों की रक्षा की जा सके।
स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेते हुए पूर्व सैनिक सेवा परिषद के सदस्य किशोर कुमार ने कहा कि राष्ट्र सेवा की भावना से ही उनका जीवन जुड़ा है। सीमा पर ड्यूटी पूरी होने के बाद भी उनका कर्तव्य समाप्त नहीं हुआ है। आज वे समाज और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए उसी जज्बे के साथ आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक स्वयं अपने आस-पास के जलस्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प लें तो प्रदूषण काफी हद तक कम हो सकता है।
राष्ट्रीय चेतना संस्थान के संस्थापक वरुण कुमार ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक-मुक्त त्योहार मनाना अत्यंत जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां पानी को जहरीला बनाती हैं, जबकि मिट्टी की मूर्तियां जल्द घुलकर मिट्टी में मिल जाती हैं और स्थानीय कुम्हारों को रोजगार भी देती हैं। उन्होंने प्राकृतिक सामग्री कागज, फूल, पत्ते, लकड़ी और बांस से सजावट करने की अपील की।
वरुण कुमार ने यह भी कहा कि घरेलू और छोटे स्तर पर विसर्जन को बढ़ावा देना चाहिए, ताकि बड़े जल स्रोतों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। इससे बच्चों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की समझ विकसित होगी। उन्होंने सभी नागरिकों से इन अभियानों में सक्रिय भागीदारी का आग्रह करते हुए कहा कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारा कर्तव्य है। अभियान में किशोर कुमार, राजीव कुमार, सत्येंद्र कुमार सिंह, शिबू मुखी, निखिल कुमार सिन्हा, आशीष झा, विश्वजीत, जसवीर सिंह, नकुल कुमार, प्रवीण कुमार और मनोज कुमार सिंह सहित कई सदस्य सक्रिय रूप से शामिल रहे।


