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Tuesday, March 10, 2026

सिख गुरुओं की परंपरा हमारी संस्कृति और मूल भावना का आधार : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर कुरुक्षेत्र में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भाग लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गुरुओं की परंपरा राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और मूल भावना का आधार है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी की स्मृति हमें ये सिखाती है कि भारत की संस्कृति कितनी व्यापक, उदार और मानवता केंद्रित रही है। उन्होंने ‘सरबत दा भला’ का मंत्र अपने जीवन से सिद्ध किया।
प्रधानमंत्री ने 9वें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर पर आज कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में एक विशेष सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी किया। उल्लेखनीय है कि गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस के अवसर को भारत सरकार एक वर्ष तक चलने वाला स्मरण उत्सव मना रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सिख गुरुओं ने हमें सिखाया है कि हमें बिना डरे और बिना किसी को डराए जीवन की हर चुनौती का सामना करना चाहिए। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उदाहरण है। आज का भारत ना डरता है, न रुकता है और ना ही झुकता है और साहस और स्पष्टता के साथ आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री ने नौजवानों को नशे की आदत से सावधान किया और कहा कि गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षा हमारे लिए इस दिशा में प्रेरणा और समाधान है। उन्होंने कहा कि युवा, समाज एवं परिवार को मिलकर इस लड़ाई को लड़ना होगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मुगलों के अत्याचार और उसके खिलाफ संघर्ष की सिख परंपरा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में गुरु तेग बहादुर जी जैसे व्यक्तित्व विरले ही होते हैं। उनका जीवन, त्याग और चरित्र हमारे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है। मुगल आक्रांताओं के कश्मीरी हिंदुओं का जबरन धर्मांतरण कराने पर गुरु साहिब ने उन्हें कहा कि वे औरंगजेब को साफ-साफ कहें ‘यदि श्री गुरु तेग बहादुर इस्लाम स्वीकार कर लें, तो हम सब इस्लाम अपना लेंगे।
उन्होंने कहा, “इन वाक्यों में श्री गुरु तेग बहादुर जी की निडरता की पराकाष्ठा थी। मुगल शासकों ने उन्हें प्रलोभन भी दिए लेकिन श्री गुरु तेग बहादुर अडिग रहे। उन्होंने धर्म और सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। गुरु साहिब को डिगाने के लिए उनके सामने उनके तीन साथियों भाई दयाला जी, भाई सतीदास जी, भाई मतिदास जी की निर्ममता से हत्या की गई, लेकिन गुरु साहिब अटल रहे। उनका संकल्प अटल रहा। उन्होंने धर्म का रास्ता नहीं छोड़ा। तब की अवस्था में गुरु साहिब ने अपना शीश धर्म की रक्षा को समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान उनकी सरकार की ओर से सिख परंपरा के संरक्षण और उसको बढ़ावा देने की सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुगलों ने वीर साहेबजादों के साथ क्रूरता की सीमाएं पार कर दी थी। उन्हें दीवार में चुनवा दिया गया था, लेकिन उन्होंने कर्तव्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा। इन्हीं आदर्श के सम्मान के लिए हम हर साल 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ के तौर पर मनाते हैं।
उन्होंने कहा, “हमारे गुरुओं की परंपरा, हमारे राष्ट्र के चरित्र, हमारी संस्कृति और हमारी मूल भावना का आधार है। मुझे संतोष है कि पिछले 11 वर्षों में हमारी सरकार ने इन पावन परंपराओं को, सिख परम्परा के हर उत्सव को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में भी स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार गुरुओं के हर तीर्थ को आधुनिक रूप से जोड़ने में का प्रयास कर रही है। इसमें करतारपुर कॉरिडोर, हेमकुंड साइट में रोपवे और प्रोजेक्ट, आनंदपुर साहिब में विरासत-ई-खालसा संग्रहालय शामिल है। हमने गुरुजनों की गौरवशाली परंपरा को अपना आदर्श मानकर इन सारे कामों को पूरी श्रद्धा के साथ किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने उनके कैबिनेट सहयोगी हरदीप सिंह पुरी के परंपरा से सहेजे गए ‘जोड़ा साहिब’ को पटना साहिब सौंपने की घटना का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “मुझे इन पवित्र ‘जोड़ा साहिब’ के सामने अपना शीश नवाने का अवसर मिला। मैं इसे गुरुओं की विशेष कृपा मानता हूं कि उन्होंने मुझे इस सेवा का, इस समर्पण का और इस पवित्र धरोहर से जुड़ने का अवसर दिया।

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