रांची स्थित Jharkhand High Court की एक पीठ ने राज्य सरकार पर कड़ी टिप्पणी की है और उसे यह चेतावनी दी है कि वह सार्वजनिक धन को “बेवजह मुकदमेबाजी” में बर्बाद न करे।
पीठ ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि सरकार स्वयं एक कल्याण राज्य है, न कि ऐसा पक्ष जो बार-बार मुकदमे दायर करके न्यायिक संसाधनों और जनता के पैसों का उपयोग करता हो।
मामला एक ऐसे अधिकारी से जुड़ा था जिनकी पदस्थापना 2013 से प्रभावी नहीं हो पाई थी। अदालत ने देखा कि सेना के आदेश के बाद भी सरकार ने इस अधिकारी की याचिका पर अपील दायर की थी, जिसे अदालत ने “बेवजह मुकदमेबाजी” करार देते हुए खारिज कर दिया।
इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि पहले उस अधिकारी को दी जाए, फिर छह महीने के अंदर संबंधित विभाग से वसूल की जाए।
साथ ही, अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि सरकार अपनी 2011 में जारी “मुकदमेबाजी नीति” (लिटिगेशन पॉलिसी) को सख्ती से लागू करे तथा ऐसे मामलों की समय-समय पर समीक्षा हो।
यह निर्णय इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि यह सार्वजनिक संसाधनों के दुरुपयोग तथा बीवजह न्याय व्यवस्था के बोझ को कम करने की दिशा में एक संकेत है। भविष्य में यह देखने योग्य होगा कि राज्य सरकार इस फैसले के बाद अपनी प्रक्रिया में बदलाव लाती है या नहीं।


