भोपाल। मध्य प्रदेश में खुद को कभी आईएएस तो कभी बड़े सरकारी विभाग की अधिकारी बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देने वाली तृप्ति सिंह राजपूत की कथित ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। चंदेरी पुलिस बुधवार को तृप्ति और उसके भाई सुभाष राजपूत को लेकर भोपाल पहुंची और उनके ठिकाने की तलाशी ली। इस दौरान पुलिस को चंदेरी के चार युवाओं के मूल दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि नौकरी लगवाने का भरोसा देकर इन युवाओं से दस्तावेज लिए गए थे। पुलिस को जांच में भोपाल के एक बिल्डर से करीब 90 लाख रुपये की ठगी और सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 80 हजार रुपये लेने की शिकायत भी मिली है।
पुलिस के अनुसार तृप्ति अलग-अलग सरकारी पदों पर कार्यरत होने का दावा कर लोगों को प्रभावित करती थी। इसके बाद वह सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से संपर्क कर उनसे रकम की मांग करती थी। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वह लैपटॉप की मदद से कथित तौर पर फर्जी जॉइनिंग लेटर तैयार करती थी। गिरफ्तारी की आशंका होने पर उसने लैपटॉप से कई फाइलें और महत्वपूर्ण डेटा डिलीट कर दिया था। पुलिस अब डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर हटाए गए डेटा को बरामद करने का प्रयास कर रही है।
भोपाल के बिल्डर से 90 लाख की ठगी का आरोप
जांच के दौरान पुलिस के सामने भोपाल के एक बिल्डर से करीब 90 लाख रुपये की ठगी का मामला भी आया है। आरोप है कि तृप्ति और उसके भाई ने सरकारी पद और प्रभाव का हवाला देकर बिल्डर को अपने विश्वास में लिया और इसके बाद उससे बड़ी रकम ऐंठी। इसके अलावा सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर करीब 80 हजार रुपये लेने की शिकायत भी पुलिस को मिली है।
चंदेरी में खुद को बताया था पर्यटन विभाग की अधिकारी
पुलिस के मुताबिक 7 अप्रैल को तृप्ति अपने भाई सुभाष राजपूत, तनुज वैश्य और अंजलि सिंह के साथ चंदेरी पहुंची थी। चारों एक होटल में ठहरे थे। इसी दौरान तृप्ति ने खुद को पर्यटन विभाग की एडिशनल डायरेक्टर बताते हुए स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाया। आरोप है कि इसी पहचान और कथित सरकारी रसूख के जरिए युवाओं से नौकरी दिलाने को लेकर बातचीत की गई और बाद में उन्हें अपने जाल में फंसाया गया।
भोपाल स्थित ठिकाने की तलाशी में मिले चार युवाओं के मूल दस्तावेजों को पुलिस ने जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और इनके बदले युवाओं से कितनी रकम ली गई थी। पुलिस के मुताबिक कथित ठगी के अन्य पीड़ित भी सामने आ रहे हैं।
डिजिटल सबूत जुटा रही पुलिस
पुलिस को आशंका है कि गिरफ्तारी से पहले तृप्ति ने ठगी से जुड़े कई डिजिटल साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। अब लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर डिलीट की गई फाइलों को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस कथित ठगी में परिवार के अन्य सदस्यों या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
चंदेरी पुलिस दोनों आरोपियों को गुरुवार को अदालत में पेश कर रिमांड मांगने की तैयारी में है। पूछताछ के दौरान पुलिस यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया गया, कितनी रकम वसूली गई और कथित ठगी के नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
