झारखंड सरकार की ओर से सोमवार को JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) रद्द करने के फैसले के बाद परीक्षा पास कर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों के एक वर्ग में नाराजगी सामने आई है। परीक्षा के जरिए नियुक्त होकर अपने-अपने पदों पर सेवा दे रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और न्याय की मांग कर रहे हैं। सरकार के फैसले से नाराज चयनित कर्मचारियों ने अब कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे अपनी नियुक्ति और नौकरी के भविष्य को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
चयनित कर्मचारियों की ओर से सरकार के फैसले के खिलाफ कानूनी चुनौती की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने, योगदान करने और करीब सात महीने तक सेवा देने के बाद अचानक परीक्षा रद्द करने का फैसला उनके लिए गंभीर संकट पैदा कर रहा है।उनका कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति के बाद अपने पदों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से उनके भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे थे। प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच और JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना शामिल था।
JSSC CGL परीक्षा रद्द होने के सरकार के फैसले ने उन करीब 1975 चयनित अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है, जो इसी नियुक्ति के आधार पर पिछले सात महीने से अलग-अलग सरकारी विभागों में नौकरी कर रहे हैं। चयनित कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने नियुक्ति मिलने के बाद अपनी जिम्मेदारी संभाली और कई अभ्यर्थियों ने इस नौकरी के लिए पुरानी नौकरी तक छोड़ दी। अब परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद उन्हें नौकरी और भविष्य दोनों पर संकट मंडराता दिख रहा है।
JSSC-CGL के जरिए नियुक्त होकर विभिन्न पदों पर काम कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा रद्द किए जाने के बाद उनकी नियुक्ति और भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जांच कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द करने से उन अभ्यर्थियों को भी नुकसान होगा जिन्होंने अपनी मेहनत और चयन प्रक्रिया के जरिए नौकरी हासिल की है।
