28 C
Kolkata
Sunday, August 16, 2026

अंग की लोक संस्कृति का महापर्व विषहरी पूजा कल से, मंदिरों में तैयारियां पूरी

भागलपुर। अंग क्षेत्र की प्राचीन लोक संस्कृति, आस्था और लोकविश्वास से जुड़ा पांच दिवसीय मां विषहरी पूजा महोत्सव सोमवार से शुरू होगा। विषहरी पूजा को लेकर भागलपुर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उत्साह का माहौल है। सभी प्रमुख विषहरी मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना, डलिया चढ़ाने और दर्शन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। पूजा के दौरान पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति और मंजूषा कला की भी झलक देखने को मिलेगी।

विषहरी पूजा का मुख्य केंद्र ऐतिहासिक चंपानगर स्थित मां मनसा-विषहरी का मुख्य मंदिर है। मां बिहुला और बाला लखेंद्र की लोकगाथा से जुड़े इस मंदिर में सोमवार सुबह से ही विशेष पूजा-अनुष्ठान शुरू होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर समिति और जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और कतारबद्ध दर्शन के इंतजाम किए गए हैं।

कलश यात्रा और प्रतिमाओं की निकलेगी शोभायात्रा

परंपरा के अनुसार पूजा के पहले दिन विभिन्न पूजा समितियों की ओर से भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ मां विषहरी की प्रतिमाओं की शोभायात्रा भी निकलेगी। ढाक, झांझ और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज के बीच निकलने वाली शोभायात्रा से शहर का माहौल भक्तिमय हो जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में भी श्रद्धालु डलवा और दौरी लेकर सामूहिक रूप से मंदिरों में पहुंचेंगे और मां विषहरी की पूजा-अर्चना करेंगे।

चंपानगर के अलावा मनसाहबजादी, भीखनपुर, परबत्ती, खंजरपुर, मंदरोजा और बरारी सहित शहर के विभिन्न इलाकों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विषहरी मंदिरों में भी विशेष तैयारियां की गई हैं। मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक सजावट से आकर्षक रूप दिया गया है।

मंजूषा कला में दिखेगी बिहुला-विषहरी की गाथा

विषहरी पूजा अंग क्षेत्र की लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ी हुई है। पूजा के दौरान यहां की प्रसिद्ध मंजूषा कला की जीवंत झलक देखने को मिलती है। मंदिरों और पूजा स्थलों की सजावट में मंजूषा चित्रकला का इस्तेमाल किया गया है। इन चित्रों में मां विषहरी के विभिन्न रूपों के साथ सती बिहुला और बाला लखेंद्र की लोकगाथा को चित्रित किया गया है।

मां विषहरी के पांच स्वरूपों जया, विषहरी, शामिलबारी, देव और दोतनी की कथाओं को भी मंजूषा चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है। इससे पूजा केवल धार्मिक आयोजन नहीं रह जाती, बल्कि अंग क्षेत्र की सदियों पुरानी लोककला, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का महत्वपूर्ण माध्यम भी बनती है।

रात में होंगे लोकनाट्य और गीतों के आयोजन

पांच दिवसीय पूजा के दौरान विभिन्न स्थानों पर रात में बिहुला-विषहरी से जुड़े लोकनाट्य और पारंपरिक गीतों के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। देर रात तक चलने वाले इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग शामिल होंगे। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्र की पारंपरिक कथाओं और लोकविश्वास की पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा।

सुरक्षा और सफाई के भी व्यापक इंतजाम

पूजा में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए नगर निगम और जिला प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली हैं। पूजा स्थलों के आसपास विशेष सफाई अभियान चलाया गया है। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने के साथ स्ट्रीट लाइटों को भी दुरुस्त किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को रात के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

चंपानगर मुख्य मंदिर सहित संवेदनशील स्थानों और प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए महिला पुलिसकर्मियों को भी ड्यूटी पर लगाया गया है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखी जाएगी। पुलिस प्रशासन ने असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखने की व्यवस्था की है।

इस तरह सोमवार से शुरू होने वाला विषहरी पूजा महोत्सव भागलपुर में धार्मिक आस्था के साथ अंग की लोक संस्कृति, मंजूषा कला और परंपरागत लोकगाथाओं का भव्य संगम प्रस्तुत करेगा।

Related Articles

नवीनतम लेख