नई दिल्ली। खेल मंत्रालय ने शासन व्यवस्था में खामियों, समय पर चुनाव नहीं कराने और मंत्रालय के निर्देशों की कथित अनदेखी को लेकर बुधवार को टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया की मान्यता निलंबित कर दी। मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ को अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ के साथ विचार-विमर्श कर भारतीय टेबल टेनिस के संचालन के लिए तदर्थ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक टीटीएफआई में विधिवत निर्वाचित और प्रभावी शासन व्यवस्था बहाल नहीं हो जाती।
मंत्रालय ने बताया कि टीटीएफआई को इस वर्ष की शुरुआत में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। महासंघ की ओर से दिए गए जवाब की समीक्षा के बाद उसे असंतोषजनक पाया गया। इसके बाद मान्यता निलंबित करने का निर्णय लिया गया। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय खेल महासंघ से अपेक्षित जवाबदेही और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली का पालन नहीं किया गया तथा मंत्रालय के निर्देशों और दिशानिर्देशों की भी बार-बार अनदेखी की गई।
समय पर चुनाव नहीं कराना बना प्रमुख कारण
खेल मंत्रालय ने टीटीएफआई की ओर से समय पर चुनाव नहीं कराने को मान्यता निलंबित करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया है। मंत्रालय के अनुसार, महासंघ में निर्धारित समय पर चुनाव कराकर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई। टीटीएफआई को इस वर्ष चुनाव कराने हैं, लेकिन अब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ को निर्देश दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ के परामर्श से टीटीएफआई में उचित आंतरिक नियामक व्यवस्था स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए। इसमें तदर्थ समिति का गठन भी शामिल है।
महासंघ की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी उठते रहे सवाल
टीटीएफआई की अध्यक्ष मेघना अहलावत ने दिसंबर 2022 में पदभार संभाला था और वह महासंघ की पहली महिला अध्यक्ष हैं। उनके कार्यकाल के दौरान महासंघ की कार्यप्रणाली को लेकर कई विवाद सामने आए। इसी वर्ष जनवरी में टीटीएफआई ने पूर्व खिलाड़ी और महासचिव कमलेश मेहता को कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया था। मेहता ने इस फैसले को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी, जिसके बाद अदालत ने उनका निलंबन रद्द कर दिया।
इस विवाद को महासंघ के भीतर चल रहे कथित सत्ता संघर्ष से भी जोड़कर देखा गया। हालांकि, टीटीएफआई ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि उसका फैसला पारदर्शिता, सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और भारतीय टेबल टेनिस के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर लिया गया था।
मणिका बत्रा के चयन को लेकर भी हुआ था विवाद
टीटीएफआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उस समय भी उठे थे, जब स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मणिका बत्रा को एशियाई खेलों की टीम में शामिल नहीं किया गया था। महासंघ ने इसके पीछे आवश्यक घरेलू मुकाबले नहीं खेलने को कारण बताया था। मणिका बत्रा ने सार्वजनिक रूप से इस फैसले की आलोचना करते हुए चयन प्रक्रिया को अस्पष्ट और अनुचित बताया था तथा खेल मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।
मंत्रालय ने चयन प्रक्रिया से जुड़े विवाद समेत टीटीएफआई की कार्यप्रणाली के विभिन्न मामलों का संज्ञान लेते हुए महासंघ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
राष्ट्रीय चैंपियनशिप में देरी पर भी नाराजगी
खेल मंत्रालय ने खिलाड़ी कल्याण सुनिश्चित करने में टीटीएफआई की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मंत्रालय ने पिछले वर्ष राष्ट्रीय चैंपियनशिप आयोजित करने में हुई देरी को इसका उदाहरण बताया। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों और प्रतियोगिताओं से जुड़े कार्यक्रमों के संचालन में समयबद्धता और पारदर्शिता आवश्यक है।
2022 में भी हुआ था निलंबन
टीटीएफआई इससे पहले फरवरी 2022 में भी विवादों में आया था। उस समय दिल्ली उच्च न्यायालय ने महासंघ की कार्यप्रणाली से जुड़े मामले में प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था। यह विवाद मणिका बत्रा की चयन नीति को लेकर चुनौती से भी जुड़ा था, जिसके चलते उन्हें एशियाई चैंपियनशिप की टीम से बाहर रखा गया था।
इसके बाद दिसंबर 2022 में नए चुनाव होने के बाद टीटीएफआई की शासन व्यवस्था बहाल की गई थी। अब एक बार फिर मंत्रालय की ओर से मान्यता निलंबित किए जाने के बाद भारतीय टेबल टेनिस महासंघ की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
