पटना। बिहार सरकार के मंत्री नीतीश मिश्रा ने झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी निंदा की है। उन्होंने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों पर छात्र आंदोलनों को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया। नीतीश मिश्रा ने कहा कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और लोकतंत्र में उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। ऐसे में झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रति विपक्ष की कथित उदासीनता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में नीतीश मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में जब छात्र सड़कों पर उतरे थे, तब कांग्रेस और विपक्ष के कई बड़े नेता खुलकर उनके समर्थन में खड़े नजर आए थे। वहीं, झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े सवालों को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या झारखंड में आंदोलन कर रहे छात्र देश के छात्र नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में छात्रों को अपनी समस्याओं और मांगों को शांतिपूर्ण एवं उचित तरीके से रखने का अधिकार है। ऐसे में अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर विपक्ष के रवैये में अंतर क्यों है, यह सवाल युवाओं के बीच भी उठ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार किसी मुद्दे पर अपना रुख बदलना विपक्ष की विरोधाभासी नीति को दर्शाता है।
नीतीश मिश्रा ने संसद में विपक्ष के रवैये पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब 15 दिनों से संसद की कार्यवाही को लगातार बाधित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार हर विषय पर चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि संसद नियमों और संसदीय परंपराओं के अनुसार चलती है और विपक्ष को अपने मुद्दे सदन में रखने के साथ सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब को भी धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि बार-बार मुद्दे बदलना और संसद की कार्यवाही बाधित करना इस बात का संकेत है कि विपक्ष वास्तव में मुद्दों पर गंभीर बहस नहीं करना चाहता। पहले किसी एक विषय को सबसे बड़ा मुद्दा बताया जाता है और सरकार की ओर से जवाब या कार्रवाई होने के बाद नया मुद्दा सामने लाया जाता है। उन्होंने कहा कि संसद बहस, विमर्श और समाधान का मंच है। सरकार जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को सरकार का पक्ष सुनने का धैर्य भी रखना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका सवाल छात्रों के आंदोलन करने के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि विपक्ष के अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रुख को लेकर है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुद्दा छात्रों और युवाओं से जुड़ा है तो उस पर हर जगह एक समान दृष्टिकोण होना चाहिए।
नीतीश मिश्रा ने बिहार में हुए कर्मचारी आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि नगर निकाय कर्मियों और कार्यपालक पदाधिकारियों की हड़ताल के दौरान सरकार ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती संवाद और विमर्श में है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की कथित विरोधाभासी नीति अब जनता और विशेषकर युवाओं के सामने है। युवा यह देख रहे हैं कि राजनीतिक सुविधा के अनुसार विपक्ष अलग-अलग मुद्दों पर अपना रुख किस प्रकार बदलता है।
पत्रकार वार्ता में प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान, प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल, कुंतल कृष्ण, नीरज कुमार शर्मा, पीयूष शर्मा और पूनम सिंह समेत अन्य नेता मौजूद रहे।
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