गुवाहाटी। असम में बाढ़ का कहर थमने के बावजूद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। राज्य के पांच जिलों में 1,92,799 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि शिवसागर और चराईदेव जिलों में दो और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 31 जुलाई के आंकड़ों के अनुसार, शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट और नगांव जिले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। इन जिलों के 17 राजस्व मंडलों के 379 गांव प्रभावित हैं और 15,430 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न है। नुमलीगढ़ क्षेत्र में धनसिरि नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
सबसे अधिक तबाही शिवसागर जिले के नेपाली खूंटी गांव में देखने को मिली है, जहां 100 से अधिक परिवारों का गांव लगभग पूरी तरह उजड़ गया है। लोग राहत शिविरों और ऊंचे स्थानों पर अस्थायी तंबुओं में रहने को मजबूर हैं। राहत और बचाव दल अब भी दुर्गम इलाकों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने प्रभावितों के लिए 54 राहत शिविर और 26 राहत वितरण केंद्र संचालित किए हैं। राहत शिविरों में 12,994 लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि 5,384 अन्य लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।
बाढ़ से 10,855 पशु भी प्रभावित हुए हैं, जबकि शिवसागर जिले में 1,461 पशुओं के बह जाने की सूचना है। इसके अलावा सैकड़ों कच्चे और पक्के मकान, मवेशी शेड तथा अन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है।
राहत और बचाव कार्य में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, वायुसेना, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में 64 मेडिकल टीमों की तैनाती की है और खाद्यान्न, पशु चारा सहित अन्य राहत सामग्री का वितरण जारी है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा लगातार हालात की समीक्षा कर रहे हैं और अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।
