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Wednesday, July 22, 2026

नेपाल में शिक्षा शुल्क पर तीन प्रतिशत कर, निजी विद्यालयों ने अभिभावकों को राहत देने की अपील की

काठमांडू। नेपाल सरकार द्वारा निजी शिक्षण संस्थानों के सभी प्रकार के शुल्क पर तीन प्रतिशत शिक्षा समता शुल्क लागू किए जाने के बाद निजी एवं आवासीय विद्यालयों के संगठन ने अपने सदस्य विद्यालयों से फिलहाल यह अतिरिक्त शुल्क अभिभावकों के बिल में नहीं जोड़ने की अपील की है।

सरकार के फैसले का बढ़ा विरोध

सरकार के नए प्रावधान के तहत निजी विद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों, चिकित्सा और अभियंत्रण महाविद्यालयों सहित निजी क्षेत्र के सभी शिक्षण संस्थानों की फीस पर तीन प्रतिशत शिक्षा समता शुल्क लगाया गया है। कुछ विद्यालयों ने अभिभावकों को अतिरिक्त शुल्क के साथ बिल भेजना भी शुरू कर दिया है।

इस बीच निजी विद्यालय संचालक संगठन के महासचिव आरबी कटुवाल ने कहा कि संगठन ने अपने सदस्य विद्यालयों से फिलहाल तीन प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क नहीं जोड़ने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सरकार से इस कर को वापस लेने का अनुरोध किया गया है और उम्मीद है कि इस फैसले पर पुनर्विचार होगा।

अभिभावकों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

कटुवाल ने कहा कि यदि किसी अभिभावक ने अतिरिक्त शुल्क का भुगतान कर दिया है और बाद में सरकार यह फैसला वापस लेती है तो अतिरिक्त राशि लौटा दी जाएगी। उन्होंने इस कर को संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि सीमित आय वाले परिवार, जो अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं, इस निर्णय से सबसे अधिक प्रभावित होंगे।

उन्होंने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर सरकार को व्यापक परामर्श के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।

गैर-लाभकारी संस्थानों को छूट

नए प्रावधान के अनुसार प्रशिक्षण संस्थानों को छोड़कर निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों, तकनीकी शिक्षण संस्थानों और अन्य निजी शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों पर भी यह शुल्क लागू होगा। हालांकि, गैर-लाभकारी सार्वजनिक शैक्षिक न्यासों के तहत संचालित शिक्षण संस्थानों को इससे छूट दी गई है।

सरकार के इस निर्णय का अभिभावकों, छात्र संगठनों, निजी शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों और उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध किया है। सभी ने सरकार से शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर लगाए गए अतिरिक्त कर के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।

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