भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 29 सितंबर से शुरू हो गई है और 1 अक्टूबर को इसका समापन होगा। इस बैठक में रेपो रेट और उससे जुड़े ब्याज दरों को लेकर बड़े फैसले हो सकते हैं। बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बार RBI मौजूदा दरों को स्थिर रख सकती है, हालांकि दरों में कटौती की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है।
क्या है पृष्ठभूमि?
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2025 में अब तक RBI ने कुल 100 बेसिस पॉइंट (bps) की कटौती कर चुकी है।
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अब जबकि जीएसटी दरों में कटौती हो चुकी है, ये उम्मीद की जा रही है कि इसका असर उधारी दरों पर भी पड़े।
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लेकिन, मुद्रास्फीति की स्थिति, वैश्विक आर्थिक दबाव और मांग की स्थिति जैसे कारणों के चलते केंद्रीय बैंक दरों में तुरंत बदलाव करने में सतर्कता बरत सकती है।
होम लोन और कार लोन धारकों के लिए संभावित असर
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यदि MPC दरों में कटौती करती है, तो फ्लोटिंग रेट या रेपो-लिंक्ड लोन धारकों की किस्तों (EMI) में कमी आ सकती है।
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दूसरी ओर, यदि दरें स्थिर रखी जाएँ, तो वर्तमान ऋण धारकों के लिए राहत नहीं होगी और उनकी EMI में बदलाव नहीं आएगा।
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कुछ बैंक अपनी आंतरिक रणनीति के तहत ब्याज दरों में छोटा फेरबदल कर सकते हैं, भले ही RBI ने मुख्य दरों में बदलाव न किया हो।


