वाराणसी। साझा संस्कृति मंच के बैनर तले शुक्रवार शाम वाराणसी के कचहरी स्थित अंबेडकर पार्क में शिक्षा संकट, परीक्षा पत्र लीक, शिक्षा के निजीकरण और लोकतांत्रिक आवाजों के दमन के विरोध में सभा आयोजित की गई। सभा के बाद प्रतिभागियों ने कैंडल मार्च निकालकर केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों के खिलाफ विरोध जताया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।
परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा नीतियों पर उठाए सवाल
सभा को संबोधित करते हुए पादरी आनंद ने आरोप लगाया कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रही अनियमितताएं, परीक्षा पत्र लीक की घटनाएं, शिक्षा की बढ़ती लागत और नई शिक्षा नीति से जुड़े सवालों ने छात्रों और युवाओं की चिंताएं बढ़ाई हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए।
शिक्षा के निजीकरण का विरोध
सामाजिक कार्यकर्ता धनंजय त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी विद्यालयों की संख्या में कमी और उच्च शिक्षा के बढ़ते खर्च से आम छात्रों की परेशानियां बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विश्वविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और कोचिंग व्यवस्था के विस्तार से गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह कठिन हो रही है।
जागृति राही ने सोनम वांगचुक और अन्य छात्र आंदोलनों के प्रति समर्थन जताते हुए परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की मांग की।
19 जुलाई को उपवास का ऐलान
नंदलाल मास्टर ने कहा कि शिक्षा नीति को वैज्ञानिक, लोकतांत्रिक और समान अवसर आधारित बनाने की जरूरत है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्तता और स्वतंत्र चिंतन को मजबूत करने की मांग की।
अधिवक्ता अबु हाशमी ने शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ते हस्तक्षेप पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षा परिसरों में स्वतंत्र विचार और संवाद का वातावरण बनाए रखना जरूरी है।
कार्यक्रम के अंत में निर्णय लिया गया कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर 19 जुलाई को शास्त्री घाट पर एक दिवसीय उपवास किया जाएगा।
सभा में विनय राय ‘मुन्ना’, गगन, सिस्टर फ्लोरिन, गौरव, डॉ. अनूप श्रमिक, नीति, जितेंद्र, महेंद्र सहित कई लोग मौजूद रहे।
