राजनीतिक रणनीतिकार एवं जन-सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने हाल ही में यह जानकारी सार्वजनिक की है कि बीते तीन वर्षों में उनकी कुल आय लगभग 241 करोड़ रुपये रही है। उसी अवधि में, उन्होंने लगभग 98 करोड़ रुपये अपनी ही पार्टी जन-सुराज को दान किए हैं।
किशोर ने यह खुलासा राजनीतिक पारदर्शिता और पार्टी के वित्तीय मामलों को लेकर जनता के भरोसे को बनाए रखने की मंशा से किया है। उनका कहना है कि यह दान पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे, चुनावी अभियान तथा अन्य जरूरी गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने में सहायक होगा।
उनकी इस घोषणा के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मची है। विरोधियों ने इस राशि और दान के स्रोतों को लेकर संदेह जताया है और यह मांग की है कि अभिलेखों व बैंक दस्तावेजों के माध्यम से सबूत पेश किए जाएँ। भाजपा और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि इस तरह भारी धनराशि का स्रोत अस्पष्ट हो सकता है और उसे धोखाधड़ी का माध्यम बनाया गया हो।
उल्लेखनीय है कि इस विषय पर भाजपा सांसद संजय जइसवाल ने सवाल उठाते हुए खुलासा मांगा है कि यह राशि कहां से आई और कैसे खर्च की गई है। उन्होंने कहा है कि यदि इस तरह की फंडिंग का तरीका पारदर्शी नहीं रहेगा, तो चुनावी प्रक्रिया और जनता का विश्वास दोनों दांव पर लग सकते हैं।


