नई दिल्ली। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने गुरुवार को देश के 16 शहरों और स्थानों पर स्वदेशी सड़क निर्माण एवं रखरखाव तकनीकों के पहले चरण की शुरुआत की। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
प्रयोगशाला से सड़कों तक पहुंचेगी स्वदेशी तकनीक
सीएसआईआर-सीआरआरआई की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सड़क तकनीकों को देशभर में लागू करने के लिए उद्योग, वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य सरकारों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में करीब 91 हजार किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क बढ़कर अब लगभग 1.47 लाख किलोमीटर हो चुका है। ऐसे में टिकाऊ, किफायती और स्वदेशी सड़क तकनीकों की जरूरत पहले से अधिक बढ़ गई है।
1,200 किलोमीटर से अधिक सड़कों पर हुआ उपयोग
सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने बताया कि संस्थान की तकनीकों का उपयोग अब तक देश में 1,200 किलोमीटर से अधिक सड़कों पर किया जा चुका है। इनमें लगभग 280 किलोमीटर लंबी स्टील स्लैग सड़कें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में देश के एक-तिहाई सड़क नेटवर्क पर सीएसआईआर-सीआरआरआई की तकनीकों को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई तकनीकों का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम में डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्मार्ट मिक्सिंग प्लांट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेटवर्क सर्वे वाहन और गड्ढा मरम्मत तकनीक का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि स्टील स्लैग सड़क, बायो-बाइंडर जैसी स्वदेशी तकनीकें सड़कों को अधिक टिकाऊ बनाने के साथ औद्योगिक कचरे के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देंगी। इससे ‘वेस्ट टू वेल्थ’, सर्कुलर इकोनॉमी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान ने कई तकनीकों का व्यावसायीकरण किया तथा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर सीएसआईआर-सीआरआरआई का प्लैटिनम जुबली लोगो, वर्ष 2026-27 का कार्यक्रम कैलेंडर और वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 भी जारी की गई। साथ ही एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।
