33.4 C
Kolkata
Tuesday, July 14, 2026

चित्रकूट: भगवान राम की तपोभूमि में बनेगा ‘तपोवन वृक्ष मंदिर’, स्वामी धर्मानंद ने लिया संकल्प

चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) । भगवान श्रीराम की पावन तपोभूमि चित्रकूट की पौराणिक देवल कुटी में ‘तपोवन वृक्ष मंदिर’ की स्थापना का संकल्प लिया गया है। कंक्रीट के बढ़ते निर्माणों के बीच चित्रकूट की प्राकृतिक और आध्यात्मिक पहचान को बचाए रखने के लिए यह एक अनूठी और अनुकरणीय पहल है। यह कुटी ‘देवल और चौरा गांव’ के मध्य, मंदाकिनी नदी के तट पर एक शांत पहाड़ीनुमा क्षेत्र में स्थित है, जो आज भी शहरी शोर-शराबे से पूरी तरह दूर है।

कुटी की चार बीघा जमीन पर महकेगा पौधों का संसार

पिछले लगभग डेढ़ दशक से इस स्थान पर तपस्या कर रहे स्वामी धर्मानंद (जिन्हें स्थानीय ग्रामीण ‘तपस्वी बाबा’ भी कहते हैं) ने इस दूरदर्शी योजना की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि देवल कुटी की चार बीघा भूमि पर औषधीय और फलदार पौधे रोपित कर एक भव्य वृक्ष मंदिर विकसित किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यहां आने वाले साधु-संन्यासियों को साधना के लिए एक शांत, जीवंत और शुद्ध वातावरण प्रदान करना है। स्वामी धर्मानंद इससे पूर्व पयस्वनी नदी के उद्गम स्थल ब्रह्मकुंड के पास भी वर्षों तक कठिन तपस्या कर चुके हैं।

श्रमदान और सरकारी अभियानों का मिलेगा सहयोग

तपस्वी बाबा के अनुसार, इस पूरे मंदिर का निर्माण और विकास पूर्णतः श्रमदान के माध्यम से किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि जलऋषि और वृक्षमित्र अभिमन्यु भाई का सहयोग मिले, तो उत्तर प्रदेश शासन के ‘वृक्षारोपण महाअभियान’ एवं ‘एक पेड़ मां के नाम’ योजना के तहत चार बीघा भूमि के लिए पौधे आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए देवल कुटी में संतों और पर्यावरणविदों के बीच गहन चर्चा के बाद अंतिम निर्णय लिया गया है।

तपोवन संरक्षण के लिए एक वर्ष की कठिन साधना

स्वामी धर्मानंद ने कंक्रीट के बढ़ते मंदिरों और घाटों के निर्माण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे तपोवन की मूल प्राकृतिक पहचान कमजोर हो रही है। इस प्राचीन विरासत को सहेजने के लिए ‘चित्रकूट तपोवन संरक्षण अभियान’ के स्वयंसेवक एकजुट हुए हैं। तपस्वी बाबा ने संकल्प लिया है कि वह इस वर्ष आश्विन (क्वार) के पवित्र महीने से देवल कुटी में एक वर्ष की कठिन तप साधना पर बैठेंगे, जो अगले वर्ष इसी महीने पूर्ण होगी। उनका लक्ष्य इस क्षेत्र को एक प्राकृतिक ‘ऑक्सीजन प्लांट’ के रूप में विकसित करना है, जहां स्थानीय बच्चे आकर योग और अध्यात्म की शिक्षा ग्रहण कर सकें।

जन-जागरूकता के लिए आयोजित होंगी गोष्ठियां

इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने के लिए वृक्षमित्र अभिमन्यु भाई ने बताया कि संत और समाज को जोड़ने के लिए जल्द ही एक विशेष संवाद श्रृंखला शुरू की जाएगी। इसके तहत देवल कुटी, सूरजकुंड, कालका देवी पहाड़ी, कामदगिरि पर्वत परिक्रमा मार्ग, लक्ष्मण पहाड़ी और ब्रह्मकुंड जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकार और समाज द्वारा रोपित किया गया एक भी पौधा सूखने न पाए और चित्रकूट की प्राचीन ‘तपोवन संस्कृति’ को पूरी तरह पुनर्जीवित किया जा सके।

Related Articles

नवीनतम लेख