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Saturday, June 27, 2026

तारातला गोदाम हादसा: मृतकों की संख्या बढ़कर हुई 16, मलबे में अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

कोलकाता । पश्चिम बंगाल के कोलकाता अंतर्गत तारातला क्षेत्र में एक निर्माणाधीन गोदाम के ढहने से हुए भीषण हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। पिछले चार दिनों से घटना स्थल पर युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। मलबे में अभी भी कुछ और लोगों के दबे होने की आशंका है, जिनकी तलाश लगातार जारी है। वहीं, हादसे में घायल 17 श्रमिकों का राजकीय एसएसकेएम (SSKM) अस्पताल में इलाज चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने दी जानकारी: मुख्य आरोपी समेत 6 गिरफ्तार

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि इस पूरे हादसे की उच्च स्तरीय जांच कोलकाता पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) कर रही है और पुलिस आयुक्त (CP) अजय नंद स्वयं इसकी पल-पल की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मामले में लापरवाही बरतने वाले मुख्य आरोपी सहित अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन मेयर फिरहाद हाकिम के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के चलते इस अवैध और कमजोर निर्माण योजना को मंजूरी दी गई थी।

पुलिस ने दर्ज की कड़ी धाराएं

कोलकाता पुलिस ने इस हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नव-लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बेहद कड़ी धाराएं लगाई हैं। पुलिस ने आरोपियों पर धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), धारा 110 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास) और धारा 3(5) (सामूहिक आपराधिक दायित्व) के तहत मामला दर्ज कर कानूनी शिकंजा कस दिया है।

रेस्क्यू में जुटीं सेना और एनडीआरएफ की टीमें

मलबे के विशाल ढेर में दबे लोगों की सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीकों जैसे भू-भेदी रडार (Ground Penetrating Radar), खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) और भारी क्रेन व पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस संयुक्त महा-अभियान में:

  • कोलकाता पुलिस की आपदा प्रबंधन इकाई

  • अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा

  • कोलकाता नगर निगम (KMC) और नागरिक सुरक्षा विभाग

  • राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) व राज्य आपदा मोचन बल (SDRF)

  • भारतीय सेना के विशेषज्ञ जवान लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

मजदूरों का रिकॉर्ड न होने से बढ़ी मुश्किल, मृतकों में 3 नाबालिग

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू ऑपरेशन को पूरी तरह समाप्त करने में सबसे बड़ी बाधा यह आ रही है कि हादसे के वक्त वहां कुल कितने श्रमिक काम कर रहे थे, इसका ठेकेदार या प्रबंधन के पास कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने यह भी खुलासा किया है कि अब तक मिले शवों में तीन नाबालिग श्रमिक भी शामिल हैं, जिन्हें नियमों के विरुद्ध वहां निर्माण कार्य में लगाया गया था।

कंक्रीट का भार नहीं सह सकी थीं लोहे की बीम

उल्लेखनीय है कि बीते बुधवार को इस निर्माणाधीन गोदाम की छत की ढलाई के दौरान ताजा कंक्रीट का भारी वजन वहां लगी लोहे की बीम और धातु की चादरें (मेटल शीट्स) बर्दाश्त नहीं कर सकीं। इसके चलते पूरी विशालकाय संरचना भरभराकर ढह गई और दर्जनों मजदूर मलबे के नीचे जिंदा दफन हो गए।

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