नई दिल्ली। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव और सीआरपीएफ के महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। एनएचआरसी ने इन घटनाओं के कारणों और जवानों की स्थिति से जुड़ी जानकारी भी मांगी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में जनवरी से 22 मई के बीच 19 सीआरपीएफ जवानों ने आत्महत्या की। पांच महीने से भी कम अवधि में सामने आए इन मामलों ने सुरक्षा बलों के जवानों के मानसिक दबाव और कार्य परिस्थितियों को लेकर गंभीर चिंता पैदा की है।
रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2025 में सीआरपीएफ में आत्महत्या के 59 मामले दर्ज किए गए, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या थी। आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कुल 281 सीआरपीएफ जवानों ने आत्महत्या की, जिनमें करीब 216 जवान उस समय ड्यूटी पर तैनात थे।
एनएचआरसी ने मामले का संज्ञान ऐसे समय में लिया है, जब सुरक्षा बलों में जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, लंबे समय तक ड्यूटी, पारिवारिक दूरी और कार्य के दबाव जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा होती रही है। आयोग की ओर से मांगी गई रिपोर्ट से आत्महत्या की घटनाओं के पीछे संभावित कारणों और जवानों के लिए उपलब्ध सहायता एवं कल्याणकारी उपायों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आयोग के नोटिस के बाद गृह मंत्रालय और सीआरपीएफ को निर्धारित समयसीमा के भीतर घटनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी एनएचआरसी को उपलब्ध करानी होगी।
