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Saturday, June 6, 2026

उज्जैन महाकाल के दरबार पहुंचे प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर: भस्म आरती में हुए शामिल, नंदी के कान में कही मनोकामना

उज्जैन । मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के प्रसिद्ध सूफी गायक कैलाश खेर ने बाबा महाकाल के दरबार में हाजिरी लगाई। उन्होंने प्रातःकालीन होने वाली विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होकर ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन किए। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

नंदी हॉल में बैठकर किए दिव्य दर्शन

कैलाश खेर तड़के सुबह करीब 3 बजे ही महाकाल मंदिर पहुंच गए थे। उन्होंने नंदी हॉल में बैठकर पूरी तन्मयता के साथ भस्म आरती के अलौकिक दर्शन किए। करीब दो घंटे तक चली इस आरती में शामिल रहने के बाद उन्होंने नंदी महाराज का विशेष पूजन-अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने सनातन परंपरा का निर्वाह करते हुए नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। पूजन के अगले चरण में उन्होंने चांदी द्वार से पुजारी के माध्यम से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया। दर्शन संपन्न होने के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा उन्हें पुष्पमाला और बाबा का विशेष प्रसाद भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान मंदिर में मौजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके साथ सेल्फी लेते नजर आए।

“महाकाल के दरबार में पहुंचना सौभाग्य”

बाबा महाकाल के दर्शन करने के बाद कैलाश खेर ने मीडिया से चर्चा की। उन्होंने इस अनुभव को अद्भुत बताते हुए मंदिर की व्यवस्थाओं को सराहा। महाकाल के दरबार में पहुंचना अपने आप में परम सौभाग्य की बात है। जो व्यक्ति बाबा महाकाल के चरणों में पहुंच जाता है, उसके जन्मों के पाप भी धुल जाते हैं। भस्म आरती के दर्शन होना भगवान की विशेष कृपा का ही प्रतीक है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के सुगम दर्शन के लिए मंदिर प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट प्रबंधन किया जा रहा है जो बेहद सराहनीय है।

त्रिपुंड, त्रिनेत्र और चंद्र से सजा बाबा का दिव्य स्वरूप

शुक्रवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी के विशेष अवसर पर संपन्न हुई इस भस्म आरती में बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार किया गया था। सबसे पहले कपूर आरती, जलाभिषेक और पंचामृत पूजन किया गया, जिसके बाद भगवान का भांग, चंदन, भस्म तथा सुगंधित पुष्पों से अद्भुत अलंकरण हुआ। बाबा को रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला, रुद्राक्ष की माला और विभिन्न आभूषण धारण कराए गए। इस विशेष श्रृंगार में त्रिपुंड, त्रिनेत्र और चंद्रमा से सुसज्जित बाबा महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।

इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरा अनुसार बाबा को भस्म अर्पित की गई। शंखनाद, ढोल-नगाड़ों की थाप और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई इस भस्म आरती के दौरान पूरा मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। इस अलौकिक दृश्य और दिव्य श्रृंगार के दर्शन कर वहां मौजूद हजारों श्रद्धालु पूरी तरह भावविभोर नजर आए।

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