मुजफ्फरपुर । बिहार के मुजफ्फरपुर शहर से आज तड़के एक बेहद दर्दनाक और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित ‘प्रसाद अस्पताल’ के सघन चिकित्सा इकाई (ICU) वार्ड में गुरुवार तड़के अचानक भीषण आग लग गई। इस हृदयविदारक हादसे में अब तक चार मरीजों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतेश मिश्रा ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हादसे के वक्त अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों के बीच चीख-पुकार और भगदड़ मच गई।
खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर निकाले गए मरीज, अस्पताल में फैला दमघोंटू धुआं
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार तड़के करीब 3:00 बजे जब पूरा शहर सो रहा था, तभी अस्पताल के आईसीयू वार्ड से आग की लपटें और काल धुआं उठने लगा। देखते ही देखते दमघोंटू धुआं पूरी बहुमंजिला इमारत में फैल गया, जिससे वार्डों में भर्ती मरीजों का दम घुटने लगा। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए दमकल विभाग की लगभग एक दर्जन (12) गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुँचीन। अग्निशमन कर्मियों और स्थानीय पुलिस ने भारी मशक्कत करते हुए अस्पताल की खिड़कियों के शीशे और लोहे के दरवाजे तोड़कर भीतर फंसे असहाय मरीजों को बाहर निकाला। रेस्क्यू किए गए सभी गंभीर मरीजों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए शहर के अन्य सुरक्षित और बड़े अस्पतालों में शिफ्ट किया गया है।
शॉर्ट सर्किट बना हादसे की वजह, कई मरीजों की हालत बेहद नाजुक
अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन की शुरुआती तकनीकी जांच में सामने आया है कि आईसीयू वार्ड में लगे किसी उपकरण में हुए शॉर्ट सर्किट की वजह से यह भयावह आग फैली थी। अधिकारियों का कहना है कि मलबे और धुएं के बीच से निकाले गए झुलसे हुए मरीजों में से कई की हालत अत्यंत चिंताजनक और नाजुक बनी हुई है, जिसके कारण मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जिला प्रशासन ने वर्तमान में पूरे अस्पताल परिसर को अपने घेरे (सील) में ले लिया है और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद से हादसे से जुड़े अन्य पुख्ता साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
हादसे के वक्त ड्यूटी से नदारद था स्टाफ, प्रबंधन की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे दर्दनाक हादसे ने अस्पताल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है। मौके पर पहुंचे वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारियों ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए संकेत दिया कि जब उनकी बचाव टीमें तड़के अस्पताल पहुंचीं, तो मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर अस्पताल का अधिकांश पैरामेडिकल और प्रशासनिक स्टाफ मौके से नदारद (फरार) था। इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर विधिक और नैतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
