काठमांडू| नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह द्वारा भारत-नेपाल सीमा विवाद पर दिए गए एक हालिया बयान ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। इस बयान के विरोध में संसद के उच्च सदन ‘राष्ट्रीय सभा’ में बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी विपक्षी दलों के सांसदों ने जमकर हंगामा किया। बैठक शुरू होते ही विपक्षी सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई।
दरअसल, यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के रविवार को प्रतिनिधि सभा (निचले सदन) में दिए गए एक संबोधन के बाद शुरू हुआ। सीमा विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा था कि इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान कूटनीतिक वार्ता और आपसी संवाद के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा बयान दे दिया जिससे विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा था, “आप लोगों को यह बात आश्चर्यजनक लग सकती है। मुझे भी प्रधानमंत्री बनने के बाद ही यह पता चला कि केवल भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि नेपाल ने भी कई स्थानों पर भारत की जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ है।” उनके इसी बयान को विपक्ष ने देश के आत्मसम्मान और राष्ट्रीय हित के खिलाफ मान लिया है।
विपक्षी दलों का साफ तौर पर आरोप है कि प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी नेपाल के राष्ट्रीय हितों और सीमा मुद्दों से जुड़ी अब तक की स्थापित सरकारी धारणा के बिल्कुल विपरीत है। विपक्ष का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री द्वारा ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान देना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेपाल के रुख को कमजोर करता है।
इस राजनीतिक रार के कारण संसद के उच्च सदन में पिछले तीन दिनों से कोई कामकाज नहीं हो सका है। हंगामे और तनावपूर्ण माहौल के चलते राष्ट्रीय सभा की पिछली दो बैठकों की तरह आज भी कार्यसूची पर चर्चा शुरू नहीं हो सकी, जिससे संसदीय कार्य पूरी तरह प्रभावित रहा। नेपाल-भारत सीमा से जुड़ा यह विषय अब दोनों देशों के कूटनीतिक गलियारों के साथ-साथ नेपाल के दोनों सदनों में एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है।
