पश्चिमी सिंहभूम| महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शनिवार को जिला प्रशासन की ओर से एक विशेष पहल की गई। खूंटपानी प्रखंड मुख्यालय से ‘चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो’ अभियान के तहत एक जागरूकता रथ (वाहन) को रवाना किया गया। इस कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पश्चिमी सिंहभूम के उप विकास आयुक्त (DDC) उत्कर्ष कुमार ने हरी झंडी दिखाकर किया।
माहवारी से जुड़ी भ्रांतियों और मिथकों को दूर करना मुख्य लक्ष्य: डीडीसी
इस मौके पर डीडीसी उत्कर्ष कुमार ने अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों की किशोरियों और महिलाओं को माहवारी से जुड़ी सही और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि समाज में आज भी इस विषय को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और मिथक फैले हुए हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। यह जागरूकता रथ सुदूर ग्रामीण इलाकों में जाकर नुक्कड़ नाटक, प्रचार सामग्री और घोषणाओं के जरिए लोगों को जागरूक करने का काम करेगा।
संकोच छोड़ सामूहिक प्रयास करने की जरूरत: जनप्रतिनिधि
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए खूंटपानी के प्रमुख सिद्धार्थ होनहागा ने कहा कि मासिक धर्म महिलाओं के जीवन की एक बेहद सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन जागरूकता के अभाव में आज भी समाज में इसे लेकर संकोच और गलत धारणाएं बनी हुई हैं। इसके खिलाफ सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। वहीं जिला परिषद सदस्य यमुना तियू ने जोर देते हुए कहा कि हर महिला और किशोरी को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक माहौल मिलना उनका अधिकार है।
साफ पानी, शौचालय और सेनेटरी पैड की उपलब्धता जरूरी: बीडीओ
प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) धनंजय ने कार्यक्रम में कहा कि जमीनी स्तर पर सभी किशोरियों को स्वच्छ सेनेटरी पैड, साफ पानी, चालू शौचालय और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारियां आसानी से मिलनी चाहिए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) खूंटपानी के प्रभारी डॉ. आलोक रंजन महतो ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि हालांकि पहले से जागरूकता बढ़ी है, लेकिन समाज में इस पर खुलकर बात करने की हिचक अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। ऐसे में यह अभियान इस चुप्पी को तोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा।
इस खास मौके पर विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहियाएं और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं व किशोरी छात्राएं उपस्थित थीं।
