रांची । झारखंड उच्च न्यायालय ने बंधुआ मजदूरों को मुआवजा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई की।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गढ़वा जिले के डीसी को निर्देश दिया कि वह प्रार्थी द्वारा उपलब्ध कराए गए बंधुआ मजदूर सूची का सत्यापन करें। जिन बंधुआ मजदूर को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है उन्हें अविलंब लाभ दिलाए। सरकार की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मुक्त कराए गए 300 से अधिक मजदूरों को तत्काल मुआवजा, पुनर्वास और अन्य सरकारी सुविधाएं दिलाया जाए।
लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकार की ओर से कहा गया है कि इससे संबंधित 300 से अधिक लोगों की सूची सरकार को दी गई है। सुनवाई के दौरान गढ़वा डीसी कोर्ट के आदेश के आलोक में आज हाजिर हुए।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि सोलापुर, महाराष्ट्र से मुक्त कराए गए महिला बधुआ मजदूर को वर्ष 2017 में ही आवास, मनरेगा कार्ड आदि सरकारी सुविधाएं दी गई है। उत्तर प्रदेश के चार जिलों मिर्जापुर, भदोही, कानपुर और प्रयागराज से मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूर के बारे में उत्तर प्रदेश के संबंधित जिलों से प्राप्त दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने मौखिक कहा था की बंधुआ मजदूरों को सरकारी लाभ दिया जाना चाहिए। इसे लेकर सरकार को संवेदनशील होना चाहिए। सरकार द्वारा दाखिल जवाब को पूरी तरह संतोषजनक नहीं माना था।
कोर्ट ने गढ़वा के वर्तमान और पूर्व उपायुक्त को तलब किया था। कोर्ट ने कहा था कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर मजदूरों को सरकारी लाभ दिलाने की योजना को अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।

