नवादा | बिहार के नवादा जिले से कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक रूहानी वारदात सामने आई है। धमाल थाने के ठीक सामने रविवार की रात शराब माफियाओं ने ड्यूटी पर तैनात चौकीदार जितेन्द्र पासवान के पेट में चाकू घोंपकर उन्हें लहूलुहान कर दिया। गंभीर रूप से घायल जितेंद्र की मौत सोमवार को इलाज के दौरान अस्पताल में हो गई। इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है।
मौत से पहले दिए बयान में खुला राज
दम तोड़ने से पहले घायल जितेंद्र पासवान ने पकरीबरावां थाना प्रभारी को अपना बयान दर्ज कराया। उन्होंने बताया कि रामपत यादव इलाके का कुख्यात शराब कारोबारी है। जितेंद्र ने पुलिस को उसकी अवैध गतिविधियों की सूचना दी थी, जिससे नाराज होकर उसने पहले भी हत्या की धमकी दी थी। मृतक के अनुसार, पूर्व में हुए हमले की लिखित शिकायत थाने में की गई थी, लेकिन पुलिस ने शराब माफिया के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिससे उसके हौसले बुलंद हो गए।
मृतक की पत्नी राम परी ने बताया कि रामपत यादव एक बड़ा शराब माफिया है, जिसका इलाके में भारी खौफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि माफिया के डर से पुलिस भी उस पर हाथ डालने से कतराती है। उनके अनुसार, जितेंद्र को पुलिस का ‘मुखबिर’ होने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
एसपी का बयान और पुलिस की थ्योरी
घटना की सूचना मिलते ही नवादा के एसपी अभिनव धीमान मौके पर पहुँचे और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष निर्देश जारी किए। हालांकि, पुलिस इस मामले को एक अलग एंगल से भी देख रही है:
एसपी के अनुसार: प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आ रही है कि यादव और पासवान परिवार के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था, जिसके चलते इस हत्या को अंजाम दिया गया।
परिजनों का तर्क: परिवार इस थ्योरी को नकारते हुए इसे सीधे तौर पर शराब माफिया द्वारा की गई हत्या बता रहा है।
थाने के सामने हत्या से उठा भरोसा
एक चौकीदार की थाने के सामने ही हत्या कर दिए जाने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में पुलिस के प्रति भारी आक्रोश है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

