रांची । झारखंड विधानसभा को पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में कवायद तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के ट्रेनिंग सेल द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यशाला में नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) के क्रियान्वयन और संवैधानिक नियमों पर विस्तृत चर्चा की गई। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए अधिकारियों को विधायी विषयों पर अपडेट रहने का निर्देश दिया।
मानसून सत्र से ‘पेपरलेस’ होने का लक्ष्य
स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने जोर देकर कहा कि आगामी मानसून सत्र से पहले नेवा (NeVA) के जरिए सदन चलाने की तैयारी पूरी कर लेनी चाहिए।
स्वायत्तता और जवाबदेही: उन्होंने कहा कि विधानसभा सचिवालय कार्यपालिका से स्वतंत्र है। यदि विधायी संस्थाएं ठीक से कार्य करेंगी, तो कार्यपालिका की जवाबदेही और बढ़ेगी।
प्रशिक्षण का महत्व: स्पीकर के अनुसार, कार्यालय के काम के साथ पढ़ाई का मौका कम मिलता है, इसलिए ऐसी वर्कशॉप अधिकारियों के ज्ञान और अनुभव को साझा करने का बेहतरीन माध्यम हैं।
क्या है नेशनल ई-विधान (NeVA)?
‘डिजिटल इंडिया’ के तहत यह एक मिशन मोड प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य ‘एक राष्ट्र-एक एप्लीकेशन’ के सपने को साकार करना है।
डिजिटल एक्सेस: इसके जरिए सदन की कार्यवाही, विधायी कार्य, प्रश्न और उत्तर सदस्यों को उनके टैबलेट और मोबाइल (m-NeVA ऐप) पर उपलब्ध होंगे।
तकनीक: यह एनआईसी क्लाउड (MeghRaj) पर आधारित एक सुरक्षित वर्क-फ्लो सिस्टम है।
फायदे: पेपरलेस होने से कागजी कार्रवाई खत्म होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी, पर्यावरण की रक्षा होगी और समय व पैसे की बड़ी बचत होगी।
वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने झारखंड विधानसभा के कामकाज के अनछुए पहलुओं पर अपनी प्रेजेंटेशन दी:
राव दीपेंद्र कुमार यादव (अंडर सेक्रेटरी): उन्होंने राज्य में NeVA लागू करने की तकनीकी बारीकियों और संवैधानिक नियमों की जानकारी दी।
विवेक कुमार (स्पेशल ऑफिसर) और कृष्ण कुमार सिंह (असिस्टेंट ब्रांच ऑफिसर): इन्होंने विधानसभा के नियमों और कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला।
रंजीत कुमार (सेक्रेटरी इंचार्ज): इन्होंने भी अधिकारियों और कर्मचारियों को इस बदलाव के लिए तैयार रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
झारखंड विधानसभा में इसके लिए आवश्यक उपकरण लगाए जा चुके हैं और अब अधिकारियों व कर्मियों को निरंतर प्रशिक्षण देकर इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

