धनबाद । कोयलांचल की जनता के लिए मुंबई की राह अब और आसान हो गई है। सोमवार रात 11 बजे धनबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 7 से धनबाद-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। हालांकि, इस ऐतिहासिक अवसर पर उपजे ‘आमंत्रण विवाद’ ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निमंत्रण रद्द होने पर मचा बवाल
कार्यक्रम की तैयारियों के बीच अंतिम समय में हुए एक घटनाक्रम ने रेलवे प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया. महापौर संजीव सिंह और झरिया विधायक रागिनी सिंह को इस उद्घाटन समारोह के लिए विधिवत आमंत्रित किया गया था। उनके नाम के बैनर और पोस्टर भी स्टेशन पर लगाए गए थे। कार्यक्रम शुरू होने से मात्र एक घंटे पहले अचानक दोनों जनप्रतिनिधियों का निमंत्रण रद्द कर दिया गया और आनन-फानन में मौके से उनके नाम वाले पोस्टर हटा लिए गए।
प्रशासनिक चूक या दबाव?
चर्चा है कि रेलवे बोर्ड के नियमों का हवाला देकर यह कदम उठाया गया, लेकिन सवाल यह है कि यदि नियम पहले से लागू थे, तो आमंत्रण जारी ही क्यों किया गया और अंतिम समय में ऐसा क्या हुआ कि निर्णय बदलना पड़ा?
सांसद ढुल्लू महतो ने दिखाई हरी झंडी
तमाम विवादों के बीच, धनबाद सांसद ढुल्लू महतो ने ट्रेन को रवाना किया। इस दौरान उन्होंने कहा “आज भाजपा का स्थापना दिवस भी है, ऐसे शुभ अवसर पर इस ट्रेन की शुरुआत धनबाद के लिए बड़ी सौगात है। जनता के विश्वास पर खरा उतरने का मेरा प्रयास जारी रहेगा। भविष्य में इस साप्ताहिक ट्रेन को दैनिक सेवा में बदलने के लिए भी रेल मंत्रालय से वार्ता की जाएगी।”
यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा
यह नई साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन धनबाद और मुंबई के बीच सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी। हालांकि, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को नजरअंदाज किए जाने और श्रेय लेने की होड़ ने इस महत्वपूर्ण उद्घाटन समारोह की गरिमा पर सवालिया निशान लगा दिया है।

