तेहरान । मध्य पूर्व (Middle East) में युद्ध के बादल अब और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को खोलने के लिए दी गई समय सीमा को ईरान ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। तेहरान ने न केवल ट्रंप की चेतावनी को ठुकराया, बल्कि उन्हें ‘बेबस’ और ‘घबराया हुआ’ करार देते हुए दो-टूक कहा है कि उन्हें किसी भी धमकी की परवाह नहीं है।
ट्रंप की ’48 घंटे’ की चेतावनी और ईरान का जवाब
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान 48 घंटों के भीतर शांति समझौता स्वीकार नहीं करता और होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को तबाह कर देगा।
इस पर पलटवार करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा “अमेरिकी धमकियों से ईरानी नागरिक विचलित होने वाले नहीं हैं। हमारे पास अपनी रक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। अगर हमारे बिजली संयंत्रों या नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ, तो दुश्मन को उसी की भाषा में करारा जवाब दिया जाएगा।”
तनाव के बीच भीषण हमले और मौतें
क्षेत्र में जमीनी हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान के पेट्रोकेमिकल संयंत्रों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है। इन हमलों में अब तक 5 लोगों की मौत की खबर है। विशेष रूप से, बुशेहर परमाणु स्थल पर हुए हमले में भी एक व्यक्ति के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
गिरफ्तारी को लेकर विरोधाभास
एक ओर अमेरिका ने दावा किया है कि उसने दिवंगत ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की भतीजी और बेटी को गिरफ्तार कर उनकी नागरिकता रद्द कर दी है। वहीं दूसरी ओर, सुलेमानी की बेटियों ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को पूरी तरह गलत बताया है। उनका कहना है कि अमेरिका में गिरफ्तार की गई महिलाओं से उनका कोई पारिवारिक संबंध नहीं है।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद करने की धमकी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर संकट खड़ा कर दिया है।

