प्रॉक्सी खातों के माध्यम से स्थानांतरित कर परतबद्ध किया गया। जांच के अहम खुलासे ईडी की जांच में सामने आया कि अवैध धन को व्यावसायिक विक्रेताओं को भुगतान दिखाते हुए परतबद्ध किया गया और बाद में इसे सुनील कुमार की पत्नी के नाम पर रांची के ओरमांझी क्षेत्र में खरीदी गई संपत्तियों में निवेश किया गया। संपत्ति खरीद की प्रक्रिया में दस्तावेजों में मूल्य को जानबूझकर कम दर्शाया गया ताकि असली कीमत छिपाई जा सके। जांच के तहत, सुनील कुमार के आवासीय परिसर में PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी अभियान चलाया गया। ईडी ने लगभग 71.91 लाख रुपये मूल्य की चल-अचल सम्पत्तियों को प्रॉविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया, जिसे बाद में निपटान प्राधिकारी ने पुष्टि की। इसके अलावा, अपराध से हुए लाभ के 31.11 लाख रुपये, जो आश्रम कल्याण निधि न्यास ट्रस्ट, रांची को स्थानांतरित किए गए थे, ट्रस्ट द्वारा ईडी को स्वेच्छा से लौटा दिए गए। यह मामला अब विशेष न्यायालय में विचाराधीन है और जांच अभी भी जारी है।


